Thursday, January 20, 2022

संज्ञा की परिभाषा / sangya ki pribhasha / संज्ञा का वर्गीकरण / sangya ka vrgikrn /अर्थ की दृष्टि से संज्ञा के भेद / arth ki drishti se sangya ke bhed / व्युत्पति के आधार पर संज्ञा के भेद / vytpti ke aadhar pr sangya ke bhed /

                                         संज्ञा की परिभाषा  / sangya ki pribhasha

किसी वस्तु के नाम को संज्ञा कहते हैं | संज्ञा से किसी वस्तु की पहचान होती है | जैसे – हिमालय, घर, पंकज, गाय, वीरता, भीड़, दूध  आदि |

                                      संज्ञा का वर्गीकरण / sangya ka vrgikrn

संज्ञा का वर्गीकरण दो आधार पर किया गया है – 1. व्युत्पति के आधार पर और 2.अर्थ के आधार पर

              व्युत्पति के आधार पर संज्ञा के भेद / vytpti ke aadhar pr sangya ke bhed 

1.  व्युत्पति के आधार पर संज्ञा के तीन भेद हैं-

क.      रूढ़ शब्द : वैसे शब्द जिसे खंड करने पर सार्थक न हो | जैसे – ‘घर’ का खंड करने पर “घ” और ‘र’ होती है, यहाँ ‘घ’ और ‘र’ सार्थक नहीं है| यथा -  घड़ा, हाथ, पैर, मुँह, कान इत्यादि |

 

ख.     यौगिक शब्द : वैसे शव्द जिन्हें खण्ड करने पर सार्थक खंडित शब्द हो | जैसे – ‘विद्यार्थी’ का खंडित शब्द ‘विद्या’ और ‘अर्थी’ है| यथा - परीक्षार्थी, विद्यालय, हिमालय इत्यादि |

 

 

ग.      योगरुद्ध शब्द : वैसे शब्द जिसका अर्थ अलग हो पर पहचान पर्याय के रूप में हो| जैसे – ‘जलज’ का अर्थ ‘जल से जन्म हुआ’ होता है पर ‘कमल’ फूल के नाम या पर्याय होता है| यथा – अंडज, पंकज, इत्यादि |

 

        अर्थ की दृष्टि से संज्ञा के भेद / arth ki drishti se sangya ke bhed 

2.  अर्थ की दृष्टि से संज्ञा के पांच भेद होते हैं –

क.      व्यक्तिवाचक –  जिसमें किसी व्यक्ति विशेष का वोध हो| यथा - राम, स्याम, हिमालय, गंगा इत्यादि |

ख.     जातिवाचक – जिसमें किसी जाति विशेष का बोध हो | यथा - गाय, बैल, मनुष्य, लड़का इत्यादि |

ग.      भाववाचक – जिसमें किसी भाव का बोध हो | यथा - धीरता, वीरता, मित्रता, सुख, दुःख इत्यादि |

घ.      समूहवाचक – जिसमें किसी समूह का बोध हो | यथा - भीड़, मेला, झुण्ड, फौज, इत्यादि |

ङ.      द्रव्यवाचक -  जिसमें किसी द्रव्य का बोध हो | यथा - दूध, घी, लोहा, सोना, चाँदी इत्यादि |

 

 

 

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