Friday, January 21, 2022

रीतिबद्ध काव्य / ritibddh kavy

              रीतिकाल की रीतिबद्ध काव्य *

                                 हिन्दी के रीतिकालीन रीतिबद्ध काव्य संस्कृत के काव्यशात्र पर आधारित है | ये काव्य धारा लक्षण देते हुए लिखे गए है | कुछ ग्रन्थ संस्कृत रचनाओं के अनुवाद हैं और कुछ छायानुवाद के रूप में प्रस्तुत किये गए हैं | इन ग्रन्थों में मौलिक उद्धभावनाएँ नहीं के बराबर हैं |

                         रीतिबद्ध काव्यों में कवि कविशिक्षकके पद पर आसीन थे, काव्य की विशेषताओं को समझने और समझाने का प्रयत्न करते हैं | दुसरे रूप में ये शास्त्र कवि भी कहें जा सकते हैं |

                           रीतिबद्ध काव्यों में लक्षणों से अधिक उदाहरण को महत्ता प्राप्त हुई है | एक ओर तो इनके रचनाओं में विशुद्ध लक्षणों की रचना की, दूसरी ओर सरस उदाहरण एकत्र कर श्रंगारपूर्ण काव्य ग्रन्थ भी लिखे |

                               रीतिबद्ध आचार्य कवियों में आचार्यत्त्व एवं कवित्व दोनों पृथक-पृथक थे | कविकर्म और आचार्य कर्म दोनों में भिन्नता थी, परन्तु रीतिकाल में यह भेद समाप्त हो गया |

 

अमीर खुसरो के दोहे, मुकरियाँ और गीत /amir khsro ke dohe mukriyan or geet

                                         अमीर खुसरो के दोहे, मुकरियाँ और गीत   1.      एक नार किया -----------------------------------...