रीतिकाल की रीतिबद्ध काव्य *
हिन्दी के
रीतिकालीन रीतिबद्ध काव्य संस्कृत के काव्यशात्र पर आधारित है | ये
काव्य धारा लक्षण देते हुए लिखे गए है | कुछ ग्रन्थ संस्कृत रचनाओं के
अनुवाद हैं और कुछ छायानुवाद के रूप में प्रस्तुत किये गए हैं | इन
ग्रन्थों में मौलिक उद्धभावनाएँ नहीं के बराबर हैं |
रीतिबद्ध काव्यों में
कवि ‘कविशिक्षक’ के
पद पर आसीन थे, काव्य की विशेषताओं को समझने और समझाने का प्रयत्न
करते हैं | दुसरे रूप में ये शास्त्र कवि भी कहें जा सकते हैं |
रीतिबद्ध काव्यों में
लक्षणों से अधिक उदाहरण को महत्ता प्राप्त हुई है | एक
ओर तो इनके रचनाओं में विशुद्ध लक्षणों की रचना की, दूसरी
ओर सरस उदाहरण एकत्र कर श्रंगारपूर्ण काव्य ग्रन्थ भी लिखे |
रीतिबद्ध आचार्य कवियों में आचार्यत्त्व एवं
कवित्व दोनों पृथक-पृथक थे | कविकर्म और आचार्य कर्म दोनों में
भिन्नता थी, परन्तु रीतिकाल में यह भेद समाप्त हो गया |