जैसे : • चारु चन्द्र की चंचल किरणें खेल रही थी जल थल में ।
जैसे: • काली घटा का घमंड घटा। •
कनक कनक ते सौगुनी मादकता अधिकाय। या खाए बौरात नर या पा बौराय।।
जैसे: • रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून पानी गए न ऊबरे मोई मानस चून।
- जब उपमान और उपमेय में अभिन्नता या अभेद दिखाया जाए तब यह रूपक अलंकार कहलाता है।
जैसे: • “मैया मैं तो चन्द्र-खिलौना लैहों”
जब किसी बात का वर्णन बहुत बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए तब वहां अतिशयोक्ति अलंकार होता है।
जैसे : आगे नदियाँ पड़ी अपार, घोडा कैसे उतरे पार। राणा ने सोचा इस पार , तब तक चेतक था उस पार।
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