दिनकर की जीवन परिचय /dinkr ki jivn prichy
दिनकर हिंदी साहित्य के इतिहास में आधुनिक काल के प्रगतिवादी काव्य धारा के प्रतिनिधि कवि हैं इन्हें धारा निरपेक्ष राष्ट्रीय काव्य धारा के कवि के रूप में भी पहचान ली जाती है अतः इन्हें राष्ट्रकवि भी कहा जाता है
जन्म
दिनकर का जन्म 8 सितंबर उन्नीस सौ आठ श्री को बिहार के मुंगेर जिला अंतर्गत बेगूसराय में हुआ था इनके पिता का नाम रवि सिंह तथा माता का नाम है
शिक्षा -
दिनकर की शिक्षा गांव के मिशन स्कूल से हुई जो सरकारी स्कूल के विरोध में कार्य करती थी प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद दिनकर उच्च शिक्षा के लिए पटना विश्वविद्यालय में दाखिला लिया जहां इन्होंने इतिहास विषय पर बीए की डिग्री हासिल की
कार्यक्षेत्र -
तत्पश्चात् 1934 ईस्वी में बिहार प्रांत में सब रजिस्ट्रार के पद पर आसीन हुए सब रजिस्ट्रार की पद में ने संतुष्टि नहीं थी जिससे कार्यालय के उच्च पदाधिकारी हुई इन्हें पसंद नहीं करते और आपको मालूम होगा कि दिनकर को 2 साल के अंतर्गत 22 बार ट्रांसपोर्ट किया गया था
इसके पश्चात दिनकर भागलपुर विश्वविद्यालय में कुलपति के रूप में कार्य किया
भारत आजाद होने के बाद जब 1952 ईस्वी में प्रथम आम चुनाव हुई तो दिनकर को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया इन्हें
राज्यसभा सदस्य के लि,,ए तीन बार मनोनीत किया । इसके पश्चात 1965 से 71 ईसवी तक हिंदी भाषा सलाहकार के रूप में भारत सरकार के अधीन कार्य किया
रचनाएं दिनकर हिंदी साहित्य के इतिहास में साहित्य की प्राया सभी विधाओं में रचनाएं लिखी हैं जैसे उपन्यास, कहानी, काव्य, निबंध आदि आदि इन विधाओं की रचनाओं में काव्य के लिए उर्वशी, कुरुछेत्र, रश्मिरथी, हुंकार, रेणुका आदि मुख्य मानी जाती है
पुरस्कार -
राष्ट्रकवि दिनकर को उर्वशी रचना के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार 1972 में प्राप्त हुई पद्मा विभूषण 1958 ईस्वी में मिला
मृत्यू -
दिनकर की मृत्यु 1974 ईस्वी में मद्रास में हुई