पाश्चात्य काव्यशास्त्र का वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
प्लेटो = 427 इस्वी० पू० – 347 इस्वी०पू०
अरस्तू = 384इस्वी०प - 322इस्वी०पू०
लोंगिनुस = प्रथम या तृतीय शताब्दी ई०
विलियम वर्ड्सवर्थ = 1770 -1850 ई०
सौमुअल टेलर कोलरेज = 1772 – 1834 ई०
बेनेदेत्तो क्रोचे = 1866-1952 ई०
टामस स्टनर्स इलियट = 1888 – 1965 ई०
ईवर आर्मस्ट्रोग रिचर्ड्स = 1893 -1979 ई०
आलोचक - रचना
प्लेटो - इओन, सिंपोसियोन, पोलितेइया, फएदरस, नोमोई,
लाँज, रिपब्लिक,
अरस्तू -
तेखनेस रितोरिकेस, (भाषाशास्त्र)
परिपोइतिकेस (काव्यशास्त्र)
लोंगिनुस -
पेरिइप्सुस
वर्ड्सवर्थ - ‘लिरिकल बैलड्स’ की
भूमिका
कोलरिज - बायोग्राफिया लिटरेरिया
(1817) द फ्रैंड,एड्स टू रिफ्लेक्शन,चर्च
एण्ड स्टेट, कंफेशंज आफ इनक्वायरिंग
स्पिरिट
क्रोचे - एस्थेटिक (न्यू
एसेज आन एस्थेटिक)
रिचर्ड्स - दि फाउंडेशन्स आँफ ईस्थेटिक्स (1922) दि मीनिग आँफ
मीनिग (1923), दि प्रिंसिपुल्स आँफ
लिटररी क्रिटिसिज्म (1924)प्रैक्टिकल क्रिटिसिज्म
(1929) साइंस
एंड पोएट्री, दि फिलोसोफी आँफ रेटारिक (1936),
कालरिज आँफ एमेजिनेशन,वियोड,एक्सपेरिमेंट्स इन मल्तिपिल
डेफिनिशन,
बेसिक रुल्ज ऑफ रीजन, इंटरप्रटेशन इन टीचिंग,
टी.एस.एलियट - दि सेक्रेड वुड (1920), सिलेक्टेड एसेज, एसेज
एन्शेंट एंड माँडन, होमेज
टू जाँन डाइडन, एलिजाबेथन एसेज, द यूज आफ
पोएट्री एंड द यूज आफ
क्रिटिसिज्म !
@ प्रमुख सिद्धांत और प्रवर्तक -
प्रमुख/सिध्दांत - प्रवर्तक
प्रत्ययवाद - प्लेटो
अनुकृति
एवं विरेचन, त्रासदी - अरस्तू
उदात्त - लोंगिनुस
संप्रेषण
एवं मूल्य - रिचर्ड्स
वस्तुनिष्ट
समीकरण - इलियट
निवैयक्तिकता का
सिध्दांत -
इलियट
संवेदनशीलता का
असाहचर्य - इलियट
परम्परा
की परिकल्पना एवं
व्यैक्तिकता का
सिध्दांत - इलियट
अभिव्यंजनावाद - क्रोचे
कल्पना
सिध्दांत -
कोलरिज
द्वन्द्ववाद - हीगेल
द्वन्द्वात्मक
भौतिकवाद - कार्लमार्क्स
महान
यथार्थवाद - जार्ज लूकाच
मिथकीय
समीक्षा - नार्थप फ्राई
स्वच्छंदतावाद - बर्डसवर्थ
अन्तर्विरोध - क्लींच ब्रुक्स
विखंडन वाद - जाक देरिदा
विडम्बना
और विसंगति - क्लींथ ब्रुक्स
विरोधाभास
(आईरनी) - रार्बट पेन वारेन
साहित्य का समाजशात्र - ईपालित तेन
अजनबीपन -
मार्क्स
पाश्चात्य आलोचकों के अनुसार कविता की परिभाषा –
·
ड्राइडन कविता रागात्मक और छन्दोबद्ध भाषा के
माध्यम से प्रकृति का अनुकरण है।
·
ड्राइडन ’’स्पष्ट संगीत कविता है।’’
·
वर्ड्सवर्थ कविता हमारे प्रबल भावों का सहज
उच्छलन है।
·
जान्सन ’’छन्दमयी वाणी कविता है।’’
·
मैथ्यू आरनोल्ड ’’सत्य तथा काव्य सौंदर्य के
सिद्धान्तों द्वारा निर्धारित उपबंधों के अधीन जीवन की समीक्षा का नाम काव्य है।’’
·
जान मिल्टन ’’सरल, प्रत्यक्ष तथा रागात्मक अभिव्यक्ति काव्य है।’’
·
वर्डसवर्थ ’’शान्ति के क्षणों में स्मरण किये हुए
प्रबल मनोवेगों का सहज उच्छलन कविता है।’’
·
पी.बी. शैली कविता सुखद और उत्कृष्ट मस्तिष्क द्वारा सुखद और
उत्कृष्ट क्षणों का संग्रह है।
·
एडगरे एलन ’’काव्य सौन्दर्य की लयपूर्ण सृष्टि है।’’
·
मैथ्यू आर्नल्ड ’’कविता मूल रूप से जीवन की आलोचना है।’’
·
कालरिज ’’सर्वाेत्तम् व्यवस्था में सर्वोत्तम
शब्द ही कविता है।’’
·
हडसन ’’कविता कल्पना और संवेग के द्वारा जीवन
की व्याख्या है।
·
पी. बी. शैली हमारे सबसे मधुर गीत वही हैं जो हमारे सर्वाधिक
विषादपूर्ण विचारों की अभिव्यक्ति है।
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