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Tuesday, May 3, 2022

सम्प्रेषण का महत्त्व / SMPRESHN KA MHTTV

                          सम्प्रेषण का महत्त्व

    सम्प्रेषण में विचारों का आदान-प्रदान होता है | अत: इसके महत्त्व को निम्न तथ्य  से जाना जा सकता है –

सम्प्रेषण का महत्त्व के तथ्य  -

·       व्यवसाय को प्रोत्साहन

·       श्रम में गतिशीलता

·       सामाजिकरण

·       समन्वय एवं नियन्त्रण

·       कार्यनिष्पादन में कुशलता

·       आपातकाल में सहायक

·       समुंद्री तथा हवाई /वायु यातायात

·       शिक्षा का प्रसार

·       विज्ञापन

·       पेशेवर लोगों के लिये सहायक

 

·       व्यवसाय को प्रोत्साहन – सम्प्रेषण से काम समय में ज्यादा काम संभव हो गया है और घरेलू एवं विदेशी व्यापर में वृद्धि हुई |व्यापारी घर बैठे ही सौदे कर सकते हैं | पुच्छ्ताछ कर सकते हैं |आदेश दे सकते हैं |स्वीकृति भेज सकते हैं |

 

 

·       श्रम में गतिशीलता – सम्प्रेषण के आसान साधनों से दुरी के दुःख दर्द कम हो गये हैं, परिवार व मित्रों से निरन्तर सम्पर्क बनाये रख सकते हैं | इस लिये लोग काम धंधे के लिये अब आसानी से दूर जाने लगे हैं |

 

 

·       सामाजिकरण – सम्प्रेषण के विविध साधनों से लोग अपने संगे-सम्बन्धी, मित्रों, परिचितों से नियमित रूप से संदेशों का आदान-प्रदान करते हैं | इसमें आपसी सम्बन्ध, प्रगाढ़ हुए हैं और समाजीकरण बढा है |

 

 

·       समन्वय एवं नियन्त्रण – व्यावसायिक गृहों एवं सरकार के कार्यालय अलग-अलग स्थानों पर स्थित होते हैं |तथा एक ही भवन के अन्दर कई विभाग हो सकते हैं | उनके बीच प्रभाव सम्प्रेषण उनके कार्यों में समन्वय स्थापित करने तथा उनपर नियन्त्रण रखने में सहायक होता है |

 

 

·       कार्यनिष्पादन में कुशलता – प्रभावी सम्प्रेषण का कार्य निष्पादन में श्रेष्ठता लाने में बड़ा योगदान होता है | व्यावसायिक इकाई में नियमित सम्प्रेषण के कारण दूसरों से ऐच्छिक सहयोग प्राप्त होता है क्योंकि वह विचार एवं निर्देशों को भली-भांति समझते हैं

 

·       आपातकाल में सहायक – यदि कोई दर्घटना घटित हो जाय या आग लग जाय तो आधुनिक संचार माध्यमों की सहायता से तुरंत सहायता माँगी जा सकती है या सहायता प्राप्त हो सकती है |

 

 

·       समुंद्री तथा हवाई /वायु यातायात – संचार माध्यम समुंद्री जहाज तथा हवाई जहाज की सुरक्षित यात्रा के लिए बहुत सहायक रहते हैं क्योंकि इनका मार्गदर्शन एक स्थान विशेष पर स्थित नियन्त्रण से प्राप्त संप्रेषण द्वारा किया जाता है |

 

 

·       शिक्षा का प्रसार – शिक्षा सम्बन्धी अनेक कार्यक्रम रेडियो द्वारा प्रसारित किये जाते हैं और टेलीफोन पर दिखाए जाते हैं | यह प्रणाली व्यक्तिगत अध्ययन के स्थान पर विधार्थियों को शिक्षा देने की एक अधिक लोकप्रिय प्रणाली बन चुकी है |

 

 

·       विज्ञापन – रेडियो तथा टेलीफोन जन साधारण से संवाद के साधन है तथा व्यावसायिक कामों के लिये विज्ञापन के महत्त्वपूर्ण माध्यम है क्योंकि इनके द्वारा बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँचा जा सकता है | 

 

 

·        पेशेवर लोगों के लिये सहायक – वकील अलग-अलग कोर्ट में जाते हैं जो दूर-दूर स्थिर होते हैं | डाक्टर कई नसिंग होम में जाते हैं और चार्टर्ड एकाउंटेंट कम्पनियों के कार्योलयों में जाते हैं | मोबाईल टेलीफोन से उन्हें अपना कार्यक्रम निर्धारित करने में तथा उसमें आवश्यकतानुसार परिवर्तन करने में सहायता मिलती है |

 

·             इस प्रकार सम्प्रेषण से आज सामान्यतया समाज और मनुष्य के बीच व्यवसाय को प्रोत्साहन, श्रम में गतिशीलता, सामाजिकरण, समन्वय एवं नियन्त्रण, कार्यनिष्पादन में कुशलता, आपातकाल में सहायक, समुंद्री तथा हवाई /वायु यातायात, शिक्षा का प्रसार, विज्ञापन, पेशेवर लोगों के लिये बिभिन्न कार्यों में सहायक सिद्ध हुई है |


हमारी अन्य लेख - बिहारी की काव्यगत विशेषता

Tuesday, April 19, 2022

विशेषण की परिभाषा, भेद,अवस्था और प्रश्नोत्तर / VISHESHN KI PRIBHASHA, BHED, AVSTHA OR PRSNOTTRI

           विशेषण की परिभाषा, भेद,अवस्था और प्रश्नोत्तर   


                               विशेषण की परिभाषा

                      जिस विकारी शब्द से संज्ञा की विशेषता बताई जय उसे ‘बिशेष्ण’ शब्द कहते हैं, जैसे - सुन्दर, काली, पीला आदि |

                 विशेषण के भेद

                           विशेषण के मुख्य चार भेद हैं

1.  गुणवाचक

2.  संख्यावाचक

3.  परिमाणवाचक

4.  सार्वनामिक

 

1.  गुणवाचक विशेषण और भेद

·  गुणवाचक विशेषण- जिस शव्द से संज्ञा का गुण, काल, आकार, दशा, स्थान, रंग आदि का बोध हो, उसे गुणवाचक विशेषण कहते हैं|

 

 गुणवाचक विशेषण के छह भेद हैं :

1.  कालवाचक – नया घर, पुरानी पुस्तक, टिकाऊ वस्तु, आगामी महीना|

2.  आकार वाचक – गोल चेहरा, चौकोर कपड़ा, नाटा आदमी |

3.  द्शावाच्क – गरीब आदमी; रोगी मनुष्य; सुखा कपड़ा |

4.  स्थान वाचक – नीचा दरवाजा; उँचा पहाड; ग्रामीण व्यक्ति |

5.  गुणवाचक – सुन्दर लड़का, सच्चा आदमी, न्यायी राजा |

6.  रंगवाचक – काली गाय, पीला कपड़ा, हरी पत्ती |

 

     

2.   संख्या वाचक विशेषण और भेद

·  संख्यावाचक विशेषण – जिस शव्द से संज्ञा या सर्वनाम की संख्या का बोध हो, उसे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं|

 

संख्यावाचक विशेषण के मुख्य दो भेद हैं

(क)              निशिचित  संख्यावाचक विशेषण  

(ख)             अनिशिचित संख्यावाचक विशेषण

 

 

·  निशिचित संख्यावाचक विशेषण के पांच भेद हैं –

1.  गणना वाचक – दो आम, छह कुत्ते |

2.  क्रम वाचक – पहला लड़का, दूसरी लडकी |

3.  आवृति वाचक – दुगना उत्साह, चौगुना दूध|

4.  समुदाय वाचक – दोनों पुस्तकें, पाँचों बच्चे |

5.  प्रत्येक वाचक – प्रत्येक व्यक्ति, प्रति वर्ष |

 

·  अनिश्चित संख्यावाचक का कोई-प्रभेद नहीं होता | ये किसी निश्चित संख्या का बोध नहीं कराते | यथा – थोड़ा पानी, सब लड़के के |

 

 

3.  परिणामवाचक विशेषण और भेद

·   परिमाणवाचक विशेषण  जैसे - सेर भर अन्न, थोड़ी जगह, कुछ आदमी |

कोई-प्रभेद नहीं होता |

 

 

4.  सार्वनामिक विशेषण

·  सार्वनामिक विशेषण – पुरुषवाचक और निजवाचक यानी मैं, तू, के सर्वनाम को छोड़ अन्य सर्वनाम जब संज्ञा के पहले प्रयोग होते हैं तो ये सार्वनामिक विशेषण कहते हैं जैसे - यह सुरत देखो, वह मकान, कोई आदमी | यहाँ यह, वह, कोई सार्वनामिक विशेषण हैं| व्युत्पत्ति के अनुसार सार्वनामिक विशेषण के दो भेद हैं –

1.  मौलिक सार्वनामिक – जो बिना रूपान्तर के संज्ञा के पहले आता है, जैसे – यह कार, वह लड़की, कोई चोर| यहाँ यह, वह, कोई मौलिक सार्वनामिक विशेषण हैं |

2.   यौगिक सार्वनामिक  - वैसा विशेषण जो मूल सर्वनामों में प्रत्यय लगने से बनता है| जैसे- कैसा कार, ऐसा शहर, जैसा देश | यहाँ कैसा, ऐसा, जैसा यौगिक सार्वनामिक विशेषण हैं |

 

 

·  विशेषण की अवस्थाएँ

1.  मुलावस्था

2.  उत्तरावस्था

3.  उत्तमावस्था

1.  मुलावस्था - यथा – राम अच्छा लड़का है | वह उच्च विद्यालय में पढ़ रहा है |.

2.  उत्तरावस्था – यथा – राम मोहन से अधिक अच्छा लड़का है | वह उच्चत्तर विद्यालय में पढ़ रहा है |

3.  उत्तमावस्था – यथा – राम सबसे अधिक अच्छा लड़का है | वह उच्चतम कक्षा का छात्र है |

 

 

 

 

*  विशेषणों के सम्बन्ध में अन्य ज्ञातव्य बातें

1. विशेषण की अवस्थाओं की आवश्यकता तभी होती है, जब तुलना का प्रश्न उपस्थित होता है | हिन्दी में तुलना के लिये ‘अधिक’, ‘सबसे अधिक’, ‘से’, ‘अपेक्षा’, ‘बनिस्बत’ आदि का प्रयोग किया जाता है | हिन्दी के तत्सम शब्दों में ‘तर’ और ‘तं’ लगाकर इन अवस्थाओं की सुचना दी जाती है | यथा –

        प्रिय           -      प्रियतर   -    प्रियतम

        लघु             -      लघुतर    -    लघुतम

        सुन्दर           -       सुन्दरतर -    सुन्दरतम

2, विशेषण विकारी होते है | इनके रूप लिंग, वचन अथवा कारक के कारण बदल जाते हैं यथा – गोरा लड़का, गोरी लड़की |

3, आकारान्त विशेषण स्त्रीलिग़ में ईकारान्त हो जाते हैं, यथा – काला-काली, मोटा-मोटी, हरा-हरी |

4, अकारांत विशेषण दोनों लीगों में समान रहते हैं, यथा – चतुर लड़का, चतुर लड़की, लाल घोडा, लाल घोड़ी |

5, कुछ शब्द मुलत: विशेषण होते हैं, यथा – सुन्दर, लाल, अच्छा आदि | कुछ आवश्यकता वश बना लिये जाते हैं – यथा – बम्बई से बम्बईया, बिहार से बिहारी, मद्रास से मद्रासी, सप्ताह से साप्ताहिक आदि |

 

 

 

                      विशेषण के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

·  विशेषण के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

 

1.विशेषण के मुख्य चार भेद हैं

(क)       4     (ख)  6   (ग)  3   (घ)   7

2.‘नाटा आदमी’ निम्न में किस प्रकार का शब्द है ?

(क)       संज्ञा      (ख)  विशेषण    (ग)  सर्वनाम    (घ)   क्रिया

3.‘प्रत्येक व्यक्ति’ में किस प्रकार का विशेषण है ?

(क)       गुणवाचक    (ख) संख्यावाचक   (ग)परिमाणवाचक (घ) सार्वनामिक

4.‘राम सबसे अधिक अच्छा लड़का है |’ में कौन सा अवस्था है ?

(क)       मुलावस्था  (ख) उत्तरावस्था (ग) उत्तमावस्था (घ) इनमें सभी

 

 

 

Monday, April 18, 2022

सर्वनाम की परिभाषा, भेद और सभी प्रश्नोत्तर / SRVNAAM KI PRIBHASHA, BHED OR SBHI PRSHNOTTR

                      सर्वनाम की परिभाषा, भेद और सभी प्रश्नोत्तर

                        सर्वनाम की परिभाषा

             संज्ञा के स्थान पर प्रयोग में आनेवाले शब्दों को ‘सर्वनाम’ कहते हैं | सर्वनाम का अर्थ है – सभी का नाम | इसे ‘संज्ञा-प्रतिनिधि’ भी कहा जाता है |

                               सर्वनाम के भेद

                             सर्वनाम के मुख्य छ: भेद हैं -

(1)     पुरुषवाचक

(2)     निजवाचक

(3)     निश्चयवाचक

(4)     अनिश्चयवाचक

(5)     सम्बन्धवाचक

(6)     प्रश्नवाचक

 

 

                                    पुरुषवाचक सर्वनाम

                           पुरुषवाचक

1.   पुरुषवाचक – नाम (स्त्री या पुरुष) के बदले प्रयोग की जाने वाले शब्द पुरुषवाचक सर्वनाम कहते है | जैसे - मैं, तू, वह, आप |

क.  उत्तम पुरुष – नाम के बदले वक्ता के रूप में प्रयोग की जाती है | जैसे - मैं सत्य बोलता हूँ |

ख.  मध्यम पुरुष – नाम के बदले श्रोता के रूप में प्रयोग की जाती है | जैसे - तुम सत्यवादी हो |

ग.  अन्य पुरुष – नाम के बदले वक्ता और श्रोता से किसी और के लिए प्रयोग की जाती है | जैसे - वह धार्मिक है |

 

 

 

 

                                                        निजवाचक सर्वनाम

                         निजवाचक

 

              2. निजवाचक – वैसे सर्वनाम जो निजता का बोध कराये | जैसे - आप

                     (क). संज्ञा या सर्वनाम के निश्चय के लिये | जैसे – मैं आप (स्वयं) देखा लूँगा |

                     (ख). भिन्नता दिखने के लिये | जैसे – स्याम अपने को सुधार रहा है |

                     (ग). निजत्व पर अधिक बल देने के लिये | जैसे – क्या वह अपने-आपको भूल गये |

                      (घ). साधारण अर्थ में | जैसे – आप भला तो जग भला |

 

                        

                                    निश्चयवाचक सर्वनाम

 

1.   निश्चयवाचक – वैसे सर्वनाम जो निश्चय का बोध कराये | जैसे –  यह, वह, सो | यह कौन है ?

 

 

                        

                           अनिश्चयवाचक सर्वनाम

                                         अनिश्चयवाचक

 

अनिश्चयवाचक – वैसे सर्वनाम जो अनिश्चय का बोध कराये | जैसे – कोई, कुछ | कोई आया होगा | पानी में कुछ है

                     

                          सम्बन्धवाचक सर्वनाम

 

                                            सम्बन्धवाचक सर्वनाम

 

1.   सम्बन्धवाचक – वैसे सर्वनाम जो एक सर्वनाम से दुसरे सर्वनाम के सम्बन्ध का बोध कराये | जैसे – जो, सो, | जो आया है, सो जाएगा |

 

                            

                             प्रश्नवाचक सर्वनाम

                                                 प्रश्नवाचक

 

प्रश्नवाचक – वैसे सर्वनाम जो प्रश्न का बोध कराये | जैसे – कौन, क्या | कौन आया? क्या चाहिये ?  

 

                                          

                                          सर्वनाम के प्रश्नोत्तर

 

 

1.   सर्वनाम के मुख्य कितने भेद हैं ?

(क)     सात    (ख)   छ       (ग)  आठ      (घ)  चार

2.   ‘मैं’ में कौन सा सर्वनाम है ?

(क) निजवाचक    (ख)   पुरुषवाचक   (ग)  अनिश्चयवाचक   (घ)  सम्बन्धवाचक    

3.   ‘आप’ में कौन सा सर्वनाम है ?

(क) निजवाचक    (ख)   पुरुषवाचक   (ग)  अनिश्चयवाचक   (घ)  सम्बन्धवाचक    

 

4.   ‘तुम’ में कौन सा सर्वनाम है ?

(क) निजवाचक    (ख)   पुरुषवाचक   (ग)  अनिश्चयवाचक   (घ)  सम्बन्धवाचक    

 

5.   ‘यह’ में कौन सा सर्वनाम है ?

(क) निजवाचक    (ख)   पुरुषवाचक   (ग)  निश्चयवाचक   (घ)  सम्बन्धवाचक    

 

6.   ‘कोई’ में कौन सा सर्वनाम है ?

(क) निजवाचक    (ख)   पुरुषवाचक   (ग)  अनिश्चयवाचक   (घ)  सम्बन्धवाचक    

7.   ‘जो’ में कौन सा सर्वनाम है ?

(क) निजवाचक    (ख)   पुरुषवाचक   (ग)  अनिश्चयवाचक   (घ)  सम्बन्धवाचक    

8.   ‘कौन’ में कौन सा सर्वनाम है ?

(क) निजवाचक    (ख)   पुरुषवाचक   (ग)  प्रश्नवाचक   (घ)  सम्बन्धवाचक    

9.   ‘वह’ में कौन सा सर्वनाम है ?

(क) निजवाचक    (ख)   पुरुषवाचक   (ग)  निश्चयवाचक   (घ)  सम्बन्धवाचक    

 

 

ANS  -    (1)  -     (2) -     (3) – क  (4)   

             (5)    (6)  ग     (7)     (8)   ग  (9)  

 

 

 

अमीर खुसरो के दोहे, मुकरियाँ और गीत /amir khsro ke dohe mukriyan or geet

                                         अमीर खुसरो के दोहे, मुकरियाँ और गीत   1.      एक नार किया -----------------------------------...