दुनिया का अनमोल रतन” कहानी की समीक्षा
दुनिया का सबसे अनमोलरतन प्रेमचंद की पहली कहानी मानी जाति है। हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, फारसी, बांग्ला, गुजराती, और मराठी के जानकार मुंशी दया नारायण निगम कानपूर
से प्रकाशित होने वाली एक उर्दू पत्रिका ‘ज़माना’ के संपादक थे। इन्होने ही प्रेमचंद की कहानी ‘दुनिया का सबसे बड़ा अनमोल रतन’
को 1907 में प्रकाशित किया था। उन्होंने ही नबावराय को
प्रेमचंद नाम दिया था। ज़माना पत्रिका के बाद यह कहानी उर्दू कहानी-संग्रह ‘सोजेवतन’ में 1908 में प्रकाशित हुई थी।
कहानी का कथावस्तु -
यह कहानी सच्चे प्रेमी
के प्रेम परीक्षा की कहानी है। इस कहानी में अनमोल रतन के रूप में देशभक्त का
चित्रण है। इस कहानी में प्रेम के लिए संघर्ष का चित्रण है। कहानी का अंत सुखद है।
यह कहानी तात्कालीन स्वतंत्रता आन्दोलन को एक नई दिशा देता है, यथा- दिलफ़िगार ने
मेंहदी-रची हथेलियों को चूमते हुए खून का कतरा उस पर रख दिया और उसकी पूरी कैफियत
पुरजोश लहजे में कह सुनायी। वह खामोश भी न होने पाया था कि यकायक यह सुनहरा परदा
हट गया और दिलफ़िगार के सामने हुस्न का एक दरबार सजा हुआ नजर आया,
जिसकी एक-एक नाजनीन जुलेखा से बढ़कर थी। दिलफ़रेब बड़ी शान के साथ
सुनहरी मसनद पर सुशोभित हो रही थी। दिलफ़िगार हुस्न का यह तिलिस्म देखकर अचम्भे मे
पड़ गया और चित्रलिखित-सा खड़ा रहा कि दिलफ़रेब मसनद से उठी और कई कदम आगे बढ़कर
उससे लिपट गयी। गानेवालियों ने खुशी के गाने शुरू किये, दरबारियों
ने दिलफ़िगार को नजरें भेंट कीं और चॉँद-सूरज को बड़ी इज्जत के साथ मसनद पर बैठा
दिया। जब वह लुभावना गीत बंद हुआ तो दिलफ़रेब खड़ी हो गयी और हाथ जोड़कर दिलफ़िगार
से बोली-ऐ जाँनिसार आशिक दिलफ़िगार! मेरी दुआएँ बर आयीं और खुदा ने मेरी सुन ली और
तुझे कामयाब व सुर्खरू किया। आज से तू मेरा मालिक है और मैं तेरी लौंडी! यह कहकर
उसने एक रत्नजटित मंजूषा मँगायी और उसमें से एक तख्ती निकाली जिस पर सुनहरे
अक्षरों से लिखा हुआ था – ‘खून का वह आखिरी कतरा जो वतन की
हिफाजत में गिरे दुनिया की सबसे अनमोल चीज है।’
देशकाल व वातावरण –
कहानी ने अंग्रजों के अधीनता के जमाने की नारी चेतना पर काम की है| नारी को
तात्कालीन समय में घर की चहर दिवारी में रखने के लिए भारतीय लोग मजबूर थे| समाज
जाति-धर्म में बंटे थे| देश में लोग हिंदूवादी और मुस्लिम संस्कृति के नाम पर
एक-दुसरे के विरोधी थे| ऐसे समय में प्रेमचन्द ने मुस्लिम संस्कृति को देश भक्त के
रूप में चित्रण करके समाज के बीच ऐकता की भावना संचार की| यथा - दिलफ़िगार ने समझा
अब काम तमाम हो गया कि मरनेवाले ने धीमे से कहा-भारतमाता की जय! और उनके सीने से
खून का आखिरी कतरा निकल पड़ा। एक सच्चे देशप्रेमी और देशभक्त ने देशभक्ति का हक
अदा कर दिया। दिलफ़िगार पर इस दृश्य का बहुत गहरा असर पड़ा और उसके दिल ने कहा, बेशक दुनिया में
खून के इस कतरे से ज्यादा अनमोल चीज कोई नहीं हो सकती। उसने फौरन खून की बूंद को, जिसके आगे यमन का
लाल हेच भी है, हाथ में ले लिया और इस दिलेर राजपूत की बहादुरी पर हैरत करता
हुआ अपने वतन की तरफ रवाना हुआ और सख्तियां झेलता हुआ आखिरकार बहुत दिनों के बाद
रूप की रानी मलका दिलफ़रेब की ड्यौढ़ी पर जा पहुँचा और पैगाम दिया कि दिलफ़िगार
सुर्खरू और कामयाब होकर लौटा है और दरबार में हाजिर होना चाहता है। दिलफ़रेब ने
उसे फौरन हाजिर होने का हुक्म दिया। खुद हस्बे मालूम सुनहरे परदे की ओट में बैठी
और बोली- दिलफ़िगार, अबकी तू बहुत दिनों के बाद वापस आया है। ला, दुनिया की सबसे
बेशकीमत चीज कहाँ है?
कहानी के पात्र –
कहानी के पात्र लोक प्रेमी, देशभक्त, राष्ट्रीय
भावना से ओत-प्रोत, हमेशा हौसला बढानें वाले पात्र हैं, यथा-
दिलफ़िगार – कहानी का मुख्य पात्र है जो कि दिलफरेब से बेपनाह प्रेम करता है।
वह अपने प्रेम को सिद्ध करने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार है।
दिलफरेब- एक बेहद खूबसूरत स्त्री और कहानी की मुख्य नारी पात्र।
काला चोर- जो एक कैदी है। जुर्म करने के कारण उसे फांसी दी जा रही थी।
एक बुजुर्ग- जो दिफिगार की हौसला अफजाई करता है।
संवाद योजना –
कहानी
की संवाद योजना पात्रानुकूल है| परिवेश और कहानी की उदेश्य की पूर्ति में लेखक को
पूरी तरह से सहयोग करते हैं| यथा - दिलफ़रेब ने उससे कहा था कि
अगर तू मेरा सच्चा प्रेमी है, तो जा और दुनिया की सबसे अनमोल
चीज लेकर मेरे दरबार में आ। तब मैं तुझे अपनी गुलामी में कबूल करूँगी।
शैली -
यह कहानी वर्णात्मक, फ्लैशबैक शैली में लिखी गई उर्दू
शब्दावली की बहुलता भी है, यथा -दिलफ़िगार इन्हीं खयालों में चक्कर खा
रहा था और अक्ल कुछ काम नहीं करती थी। मुनीर शामी को हातिम-सा मददगार मिल गया। ऐ
काश, कोई मेरा भी मददगार हो जाता! ऐ काश, मुझे भी उस चीज
का, जो दुनिया की सबसे बेशकीमत चीज है, नाम बतला दिया जाता! बला से वह चीजें हाथ न आती मगर मुझे इतना तो मालूम हो
जाता कि वह किस किस्म की चीज है। मैं घड़े बराबर मोती की खोज में जा सकता हूँ। मैं
समुन्दर का गीत, पत्थर का दिल, मौत की
आवाज़ और इनसे भी ज्यादा बेनिशान चीज़ों की तलाश में कमर कस सकता हूँ। मगर दुनिया
की सबसे अनमोल चीज़! यह मेरी कल्पना की उड़ान से बहुत ऊपर है|
उदेश्य –
कहानी ने अंग्रजों के अधीनता के जमाने की नारी
चेतना पर काम की है| नारी को तात्कालीन समय में घर की चहर दिवारी में रखने के लिए
भारतीय लोग मजबूर थे| समाज जाति-धर्म में बंटे थे| देश में लोग हिंदूवादी और
मुस्लिम संस्कृति के नाम पर एक-दुसरे के विरोधी थे| ऐसे समय में प्रेमचन्द ने
मुस्लिम संस्कृति को देश भक्त के रूप में चित्रण करके समाज के बीच ऐकता की भावना
संचार की|
निष्कर्ष है कि "दुनिया की अनमोल रतन" प्रेमचन्द की लिखी गई प्रसिद्ध कहानी है | इसमें भारतीय लोगों के ह्रदय में देशभक्त, राष्ट्रीय-भावना को संचार करने के उदेश्य से लिखा गया है | इनके कहानी सम्बन्धी सभी तत्व कहानी को सफलता प्राप्त करने में सफल है |
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