Monday, January 26, 2026

                     


                                                      अमीर खुसरो के काव्य/रचनाओं की विशेषता

           अमीर खुसरो आदिकालीन खड़ी बोली हिन्दी भाषा साहित्य के प्रवर्तक साहित्यकार हैं | इन्होंने काव्य भाषा में आम –जनों के भाषा के साथ उर्दू-फारसी शब्दों को मिलाकर खड़ी बोली हिन्दी के रूप में प्रतिष्ठित किया | इस प्रकार काव्य भाषा में परम्परा से संस्कृत, पालि, प्राकृत, अपभ्रंश, अवहट्ट के बाद खड़ी बोली हिन्दी के रूप में आने लगी | साथ ही काव्य के विषय पछ में दरबारी काव्यों के साथ सम्प्रदाय निरपेक्ष लौकिक साहित्य दृष्टिगोचर हुई |आधुनिक हिन्दी भाषा साहित्यकारों ने निम्न प्रकार के विशेषताओं को पाया है –

1.                                                                                                आम-जन के विषयक काव्य

 अमीर के पूर्व या समकाल में साहित्यकार दरवारी, धार्मिक, सम्प्रदायों से सम्बन्धित विषयक रचनाएँ होते थे | अमीर ने काव्य के विषय पछ को साधारण जन से सम्बन्धित तत्व जैसे – दर्पण, पान, बादल, आकाश, आदि को स्थान दिया | यथा –

                                         अरथ तो इसका बुझेगा | मूँह देखो तो सूझेगा ||    -दर्पण

2.                                                                                                                     उक्ति-वैचित्रता 

         – अमीर के काव्य में उक्ति –वैचित्रता की प्रधान्य है | अपनी विषय को कुतुहुलता के साथ लेट हैं , जिससे उक्ति वैचित्रता की कला और ही गहराई के साथ पाठक के मानस ह्रदय में उभर आती है | विषय में उक्ति-वैचित्रता इतनी है कि कविता पाठक से कोई उत्तर की प्राप्ति के लिये ललायित रहता है | जैसे –

                        एक थाल मोटी से भरा | सबके सिर पर औंधा धरा ||

                     चारों ओर वह थाली फिरे | मोती उससे एक न गिरे ||    -आकाश

3.                                                                                                                मसनवी पद्धति का विकास 

– मसनवी पद्धति उर्दू साहित्य की प्रधान विधा है पर हिन्दी साहित्य में उर्दू से ही आयी है | माना जाय तो अमीर खुसरो ने ही इसे हिन्दी में प्रवर्तन किया | मसनवी यानि नायिका द्वारा प्रेम की चाहत में नायक के प्रति सदैव चिन्तामग्न होकर अकेली सोचते रहना है| आधुनिक साहित्यकारों ने हिन्दी साहित्य में मसनवी को मनोवैज्ञानिकता का सबसे अच्छा उदाहरण प्रस्तुत किया|

4.                                                                                                                                         रहस्यात्मकता 

-                  अमीर खुसरो के काव्य काव्य रहस्य भावना के पहले द्रष्टा हैं | इनके काव्य वैचित्रता व कुतुहुलता से रहस्यवाद को पैदा करते हैं | रहस्यता की झाँकी अमीर ने गुरु निजामुद्दीन के बीच प्रेम की अभिव्यक्ति में सटीक रूप से उपस्थित किया है | सच कहा जाय तो हिन्दी साहित्येतिहास में आध्यात्मिकता के कविता में रहस्य भावना का सर्वप्रथम प्रवर्तन किया है |इसमें आदिकालीन नाथ, सिद्ध कवि के साथ-साथ सम्प्रदाय निरपेच्छ धारा के कवियों का भी योगदान रहा है |

5.                                                                                        खड़ी बोली हिन्दी को प्रतिष्ठित साहित्य भाषा की दर्जा

          – अमीर खुसरो के पहले प्रतिष्ठित साहित्य की भाषा संस्कृत, पालि, प्राकृत. अपभ्रंश तथा अवहट्ट था | पर अमीर ऐसे साहित्यकार निकले जिन्होंने आमजनताओं के बीच के भाषा को काव्य का दर्जा दिया इसलिए अमीर को खड़ी बोली हिन्दी भाषा के प्रवर्तक के रूप में माना जाता है |

6.                                                                                                                                                     तुकबन्दियां

– अमीर खड़ी बोली हिन्दी भाषा काव्य के जनक हैं | इन्होंने इस भाषा को काव्य के भाषा के तौर पर इतनी प्रतिष्ठित किया कि काव्य में तुकबंदियों का एक विशेष कला उभर आयी | इस कला को भक्तिकालीन, रीतिकालीन कवियों ने प्रधान कला के रूप में स्वीकार किया |

7.                                                                                                                                      रसीले गीत और दोहे 

–अमीर खुसरो संगीतज्ञ भी थे | प्रसिद्ध वादक तबले का विकास सर्वप्रथम किया था | अत: संगीत के इस ज्ञाता ने नाथ और सिद्ध सम्प्रदाय के अरसीले तत्वों से मुक्त करके लौकिकता में भी अलौकिकता के विषय को रसीले दंढंग से प्रस्तुति दी |

8.                                                                                                                                             मनोरंजनात्मक काव्य 

–                         हिन्दी साहित्य में आदिकालीन हिन्दी साहित्य दरवारों के लिये ही लिखे जाते थे | राज्य के आम-जनताओं या साधारण लोगों के लिये नहीं होते थे | इस पृष्ठिभूमि में अमीर खुसरो ही सर्वप्रथम ऐसे कवि साहित्यकार हैं जिसने साधारण जनों के लिये लिखा जिससे आम-आदमी भी साहित्य के रस को पान करने लगे | खुसरो के काव्य के प्रधान तत्व वैचित्र्यता, कुतुहल, रहस्यात्मकता, मसनवी आदि तत्वों को समझ-समझकर मनोरंजन करने लगे |

9.                                                                                                                           भाषा कोशीय ग्रन्थ के संथापक 

                               – अमीर खुसरो साहित्य में कुतुहल, विचित्र्यता,रहस्य. मसनवी आदि भावों की स्थापना ही नहीं किया बल्कि खलिकबारी जैसे कोशीय ग्रन्थ की रचना करके हिन्दी भाषा में उर्दू-फारसी के शब्दों को समिश्रण करने में सहुलियत प्रदान की है |

10.                                                                  नवीन छंदों के संस्थापक

                       – अमीर ने गजल, मुकरी, गीत आदि नवीन छंदों की स्थापना दी है | आधुनिक काल में ये छंद सबसे प्रचलित और लोकप्रिय छंद में हैं |


             अन्य लेख -- पश्चायत काव्यशास्त्र का वस्तुनिष्ठप्रश्नोत्तर



                                    

 

 

 

 

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अमीर खुसरो के दोहे, मुकरियाँ और गीत /amir khsro ke dohe mukriyan or geet

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