Friday, March 18, 2022

पर्यावरण :एक परिचय / pryavrn : ek prichy

                                                             पर्यावरण :एक परिचय


·       पर्यावरण का अर्थ -

-          पर्यावरण का अर्थ है भैतिक परिबेश

-          पर्यावरण के तत्वों के दो प्रधान समूह – (1) अजैव तत्त्व (2) जैव तत्त्व

-          अजैव तत्वों में जलवायु, स्थल,जल, मृदा, खनिज, एवं चट्टान तथा भौगोलिक स्थिति प्रमुख है !

-          जैव तत्वों में पौधे और जीव-जन्तु


-          पर्यावरण की विशिष्टता

(1)    पर्यावरण भौतिक तत्वों का समूह है,

(2)    भैतिक पर्यावरण अपार शक्ति का आधार है,

(3)    पर्यावरण में विशिष्ट भौतिक प्रकिया कार्यरत है,

(4)    पर्यावरण में प्रभाव दृश्य और अदृश्य होता है,

(5)    पर्यावरण परिवर्तनशील होता है,

(6)    स्वनियंत्रित और स्वपोषण पर आधारित है,

(7)    क्षेत्रीय विविधता होता है,

(8)    पार्थिक एकता विद्यमान है,

(9)    जैव जगत का आवास है,

(10)संसाधनों का भण्डार है,


-          पर्यावरण के अजैव तत्वों में जलवायुसर्वाधिक शक्तिशाली है,

-          भौतिक तत्त्व पर्यावरण संतुलन रखने के लिए अंन्त:प्रक्रियाकरती है,

-          पर्यावरण के प्रमुख तत्त्व समूह का परस्पर या शाश्त्व सम्बन्ध है,


-          पर्यावरण के तत्त्व दो प्रकार के शक्ति में विभक्त हैं

(1)    अन्तर्जात शक्ति जैसे गुरुत्व बल, केंद्र्प्सारी बल, एवं निर्माणकारी शक्ति आदि 

(2)    बाहय शक्ति जैसे सौर उर्जा, तापमान, वायुवेग, जलवेग, आदि !

-          भूकम्प, ज्वालामुखी, सहित धरातलीय रचना के उत्तरदायी निर्माणकारीशक्ति है,

-          पौधे भोजन बनाते है सौर उर्जा से

-          प्रकृति के निर्माण और विनाश सतत-प्रक्रियासे होती है,

-          सूर्य की पराबैंगनी किरण को छानती है ओजोन गैस

-          पर्यावरण का प्रमुख संसाधन मृदा, जल, खनिज, वनस्पति, पशु,एवं स्वयं मनुष्य हैं

-          पर्यावरण के दो प्रकार –(1) भौतिक पर्यावरण (2) सांस्कृतिक पर्यावरण

-          प्राकृतिक पर्यावरण में जन्में और पलने वाले पारस्पर क्रिया द्वारा एक व्यवस्था को जन्म देता है उसे पारिस्थितिकीकहते हैं !

-          पर्यावरण के तत्त्व आपसी अंन्त:प्रक्रिया की दृष्टि से तीन भागों में बनता जा सकता है

(1)    भौतिक तत्त्व धरातल, जलवायु, मृदा, जल, वायु, खनिज आदि !

(2)    उर्जा तत्त्व ताप एवं प्रकाश

(3)    जैव तत्त्व वनस्पतियाँ एवं जीव


-          पर्यावरण अध्ययन का मूल उद्देश्य और सीमा के दो आदर हैं-

(1)    पर्यावरण के तत्वों और जीवों का अन्तसम्बन्ध और संबधित समस्याएँ,

(2)    पर्यावरण की अवमानना से उत्पन्न समस्यायें और उनका समाधान

-          पर्यावरण की आवश्यक या महत्ता है जैविक विकाश, संवर्धन,और रक्षा के लिए अनुकूल दशा का निर्माण !

-          जैव तत्त्व में मनुष्य सर्वपरी है !

-          पर्यावरण-क्षारण प्रक्रिया को उत्प्रेरित किया

(1)    मानव समाज की बढ़ती जनसंख्या

(2)    मानव समाज की बढ़ती आवश्यकता

-          पर्यावरण का निर्माण कर्ता मनुष्यहै ,

-          पृथ्वी के वायुमण्डल का तापमान सामान्य से ०.5 डिग्री से० अधिक हों गया है,

-          पर्यावरण को बदलने में सर्वपरि सहायक है – ‘मनुष्य और वायुमण्डल

-          पृथ्वी के वायुमण्डल का तापमान वृद्धि में सहायक गैस है कार्बन डाइआँक्साइड

-          पृथ्वी के पौधघर प्रभाव को बनाये रखने में मिथेन, नाइट्रजोन आँक्साइड और ओजोन का महत्त्व है !

-          पृथ्वी तल में हिम आवरण है – 11 % क्षेत्रफल में

-          वैज्ञानिक के अनुसार पृथ्वी में कितना तापमान के वृद्धि होने से भयावह स्थिति होने का अनुमान है – 3 से 4 डिग्री से० तापमान !

-          पर्यावरण संतुलन के लिए पृथ्वी में वनों का आच्छादित रहना चाहिए – 33.33 %

                              -   कौन सा वृछ पर्यावरण संतुलन के लिए हानिकारक है यूकेलिप्ट्स 


अमीर खुसरो के दोहे, मुकरियाँ और गीत /amir khsro ke dohe mukriyan or geet

                                         अमीर खुसरो के दोहे, मुकरियाँ और गीत   1.      एक नार किया -----------------------------------...