चंदबरदाई का जीवन,लोक कथा और प्रश्नोत्तर
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चंदबरदाई साहित्यिक परिचय
चंदबरदाई हिन्दी साहित्य के इतिहास में आदिकाल के प्रतिनिधि कवि हैं |
आचार्य शुक्ल इन्हें हिन्दी का पहला महाकाव्य लिखने वाले महाकवि के रूप में
स्वीकार किये हैं | इनकी रचना पृथ्वीराजरासो हिन्दी की पहला महा काव्य माना जाता
है | इस महा काव्य में पृथ्वीराज चौहान के जीवन गाथा का मनोहारी बर्णन किया गया
है | कवि चंदबरदाई पृथ्वीराज चौहान के समकालीन कवि थे | कहा जाता है कि दोनों का
जन्म एक ही दिन हुआ और एक ही दिन मृत्यु को प्राप्त किये |
चन्दवरदाई की कथा राजपूतों के बीच प्रचलित है कि भारतबर्ष के अंतिम
हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान के राजकोषीय मंत्री,मित्र और सामन्त थे | ये राजा
के साथ हमेशा रहते चाहे राजदरबार, युद्ध भूमि, शिकार आदि मनोरंजनात्मक खेल ही
क्यों न हो |
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चंदबरदाई का
जीवन परिचय
चंदबरदाई का जन्म लाहौर में हुआ था कहा जाता है की पृथ्वीराज का जन्म
संवत् 1205 में और मृत्यु 1249 में हुई थी, अत: महाकवि चंदबरदाई का जन्म और
मृत्यु भी यही होगा | इनके पिता का नाम ‘राववेन’ और विद्या गुरु का नाम ‘गुरु
प्रसाद’ था | ये ‘भट्ट’ जाती के ‘जगात’ गोत्र के थे | चाँद ने दो विवाह किये थे,
पहली पत्नी का नाम ‘कमला’, उपनाम ‘नेवा’ तथा दूसरी पत्नी का नाम ‘गौरी’ उपनाम
‘राजीरा’ था | इनके ग्यारह संतानें हुई, दस लड़के और एक लड़की |
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पृथ्वीराज और चंदबरदाई के बिषय में लोक
कथाएँ
पृथ्वीराज और चंदबरदाई के बिषय में किवदंती है कि मुसलमान बादशाह मोहम्मद
गौरी राजा पृथ्वीराज चौहान को बंदी बना कर गजनी ले जा रहा था | यह समाचार
चंदबरदाई सुनते ही अपनी महाकाव्य की
रचना छोड़ तथा रचना कार्य अपने छोटे पुत्र (जल्लन) को शौंप कर राजा के पीछे चल
पड़ा जैसा की महा काव्य में उधृत है – ‘पुस्तक जल्ह दै चलि गज्जन नृप काज “
फिर गजनी में गौरी ने पृथ्वीराज
के दोनों आँखों को कुचल कर कारागार में रख लिया | कवि चंद राजा व परम मित्र
पृथ्वीराज को कारागार से निकाल ने की उपाय सोचने लगे | इन्होंने बादशाह के पास
पृथ्वीराज के शब्दबेधी बाण चलाने की कौशलता को परखने के लिये सुचना दी, बादशाह
भी राजी हो गया, बादशाह और चंदबरदाई एक उँचे आसन में बैठे पृथ्वीराज के इस
कौसलता को देखते रोमांचित हो बादशाह जब वहा ! वहा ! की आवाज की और इधर से अपने
राजकवि चंदबरदाई द्वारा इशारा प्राप्त करके राजा पृथ्वीराज ने इस ल्छयित बाण से
बादशाह को मार डाला | अतंत: राजा और चंदबरदाई भी अपने-अपने वरछि से एक-दुसरे के
प्राण हर कर आत्म हत्या कर लिये | इस प्रकार राजा और मंत्री अपने शत्रु गौरी को
वध कर युद्ध हारने का बदला लिया |
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चंदबरदाई की रचना
चंदबरदाई
की रचना ‘पृथ्वीराज रासो’ महाकाव्य है | यह 69 समयों में विभक्त है | इसकी भाषा
को भाषाशात्त्रियों ने राजस्थानी व
ब्रजभाषा मिश्रित बताया है | पृथ्वीराज रासो में छंदों की बहुलता है, संख्या की
दृष्टि से 68 छंद हैं | छंदों की बहुलता के कारण चंदबरदाई को छंदों का बादशाह भी
माना जाता है | प्रमुख छंद हैं – छप्पय, तोटक, तोमर, आदि हैं | शैली में पिंगल
तथा डिंगल माना है, पिंगल शैली में कोमलकांत शब्दावली प्रयोग होती है वही डिंगल
शैली में कर्कश शब्दावली का प्रयोग है | प्रसिद्ध शैली कड़वक इसी कवि की देन है |
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पृथ्वीराज चौहान की जीवन वृत्त
पृथ्वीराज चौदहवीं शताब्दी के वीर, साहसी, शब्दवेधी वाण चलाने में माहिर,
रण में कौशल योद्धा थे | इनका जन्म संवत् 1205 को अजमेर में हुआ था | पिता का
नाम सोमेश्वर सिंह चौहान था | इनके नाना दिल्ली के शासक व सम्राट थे | नाना का
नाम अनंगपाल सिंह है | इनके मृत्यु के पश्चात् कोई उतराधिकारी नहीं था | अत:
पृथ्वीराज चौहान ने दिल्ली के राजसिंहासन में आसीन हुये | पृथ्बी राज के रूप और
स्वभाव की ख्याति सारे भारतबर्ष में थीं | कनौज की राजकुमारी और जयचंद की पुत्री
संयोगिता इनसे प्रेम करती थी | तराईन की प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय युद्ध इनके
द्वारा ही लड़ा गया था | तृतीय युद्ध भारतबर्ष के लिये ऐतिहासिक निर्णायक युद्ध
था | पृथ्वीराज के हार से भारतबर्ष की सम्पूर्ण राज्य सत्ता मुसलमान के हाथों
चली गई थी | इनकी मृत्यु अपने राज्याश्रय कवि चंदवरदाई के साथ संवत् 1249 को
गजनी में हुआ था |
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प्रमुख प्रश्नोत्तर
- चंदबरदाई
हिन्दी साहित्य के इतिहास में किस काल के प्रतिनिधि कवि हैं ? उत्तर –
आदिकाल - आचार्य
शुक्ल किन्हें हिन्दी का पहला महाकाव्य लिखने वाले महाकवि के रूप में स्वीकार
किये हैं ? उत्तर –
चंदबरदाई - चंदबरदाई
की रचना ‘पृथ्वीराज रासो’ किस प्रकार का काव्य है ? उत्तर –
महाकाव्य - पृथ्वीराज
राज रासो कितने समय में विभक्त है ? उत्तर –
69 समय में - पृथ्वीराज
रासो की भाषा को भाषाशात्त्रियों ने किस रूप में स्वीकार की है ? उत्तर - राजस्थानी व ब्रजभाषा मिश्रित | - पृथ्वीराज
रासो में छंदों की बहुलता है,संख्या की दृष्टि से कितने छंद हैं ? उत्तर –
68 छंद - किस
महाकवि को छंदों का बादशाह माना जाता है ? उत्तर –
चंदबरदाई - पृथ्वीराज
चौहान का जन्म कब और कहाँ हुई ? उत्तर - संवत् 1205 को अजमेर में हुआ था | -
पृथ्वीराजचौहान की मृत्यु अपने
राज्याश्रय कवि चंदवरदाई के साथ कब और कहाँ हुई ? उत्तर
- संवत् 1249 को गजनी में हुआ था | -
इतिहास प्रसिद्ध तराईन की लडाई का
उल्लेख किस महाकाव्य में मिलता है ? उत्तर
– पृथ्वीराज रासो में |