भारतीय काव्य शास्त्र वस्तुनिष्ट
• भारतीय काव्य लक्षण और व्याख्याकार –
तद्दोशौ शब्दार्थो सगुणावनलंकृति पुनःकवापि – मम्मट
वाक्यं रसात्मक काव्यं- विश्वनाथ
रमणीयार्थ प्रतिपादक : शब्द : काव्यम –पंडितराज जगन्नाथ
• भारतीय संस्कृत काव्य ग्रन्थ एवं लेखक समयावधि
नाटयशास्त्र – भरत मुनि - 2 सदी से 2सदी के मध्य तक
काव्यालंकार – भामह – 6 वी० शती का मध्यकाल
काव्यादर्श - डंडी – 7 वी ० शती का उत्तरार्द्ध6 वी० शती का मध्यकाल
व्यालंकार सूत्र वृति – वामन - 8 से 9 वी शती के बीच
काव्यालंकार सार संग्रह- उद्भट - 9 वी०शती का पूर्वार्द्ध
काव्यालंकार- रुद्रट – 9 वी० शती का पूर्वार्द्ध
ध्वन्यालोक- आनन्दवर्धन – 9 वी० शती का मध्यकाल
श्रृंगार तिलक – रूद्र भट्ट – 10 वी० शती
ध्वन्यालोकलोचन- अभिनव गुप्त – 10 – 11वी० शती
वक्रोतिजिवितम- कुतंक – 10 -11 वी० शती
व्यक्तिविवेक- महिम भट्ट – 11 वी० का मध्यकाल
काव्यप्रकाश- मम्मट – 11 वी० शती का उत्तरार्द्ध
औचित्यविचार चर्चा – क्षेमेन्द्र – 11 वी० शती का उत्तरार्द्ध
काव्यानुशासन – हेमचन्द्र – 12 वी० शती का
चंद्रलोक - जयदेव – १३ वी० शती का मध्यभाग
साहित्य दर्पण – विश्वनाथ – 14 वी० शती
रसगंगाधर- जगन्नाथ – 17 वी० शती का मध्य काल
• आधुनिक हिंदी साहित्य के ध्वनि शास्त्रीय ग्रन्थ और ग्रन्थकार –
काव्यलोक, काव्यदर्पण – प० रामदहिन मिश्र (1942 ई०)
ध्वन्यालोक – आ० विश्वेवर (1950 ई०)
रस – विमर्श – डॉ राममूर्ति त्रिपाठी
रस मीमांसा – आ० रामचन्द्र शुक्ल
• ध्वनी के भेद और भेद्कार मान्य संख्या
आन्दबर्धन – 3 (ध्वनि, गुणी भुत, चित्र )
• ध्वनी के भेद और भेद्कार मान्य संख्या
• रस के आधुनिक हिन्दी आचार्य के भेद और भेद्कार मान्य संख्या
रस विमर्श – डॉ राममूर्ति त्रिपाठी
रस मीमांसा – आ० रामचन्द्र शुक्ल
• भारतीय काव्य सिध्दांत एवं उनके प्रवर्तक
रस सिध्दांत- भरत - 2 सदी से 2सदी के मध्य तक
अलंकार सिध्दांत – भामह - 6 वी० शती का मध्यकाल
रीति सिध्दांत- वामन - 6 वी० शती का मध्यकाल
ध्वनिसिध्दांत- आनन्दवर्धन – 9 वी० शती का मध्यकाल
वक्रोक्ति सिध्दांत- कुतंक -10 -11 वी० शती
औचित्य सम्प्रदाय- क्षेमेन्द्र - 11 वी० शती का उत्तरार्द्ध
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भक्तिकाव्य : वस्तुनिष्ट काव्य शास्त्र
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