Sunday, July 30, 2023

भारतीय साहित्य की विशेषताएँ - डा० विद्याधर मेहता

  

                      भारतीय साहित्य की विशेषताएँ

   भारतीय साहित्य विश्व के अन्य साहित्य के लिए प्रेरक व् सम्मानीय है, क्योंकि यह साहित्य विस्तृत क्षेत्रफल, प्राचीन इतिहास व् परम्परा, बहुभाषिक भावना, मनिकंचन कलात्मक रूप व् स्वरूप, बहु विषयक भावना के साथ ही उदात मानवीय चेतना से प्रेरित है |

भारतीय साहित्य विपुल क्षेत्र में विस्तृत फैला है | यह परगना, राज्य, प्रान्त, देश के आलावे विदेशों में भी फैला है, यह देशिक से विदेशिक भाषा भी बन गई है | यह भारत के आलावे मलेशिया, इंडोनेशिया, फिजी, सूरीनाम, वियतनाम, चीन, जापान इंग्लैंड, थाईलैंड, मोरिसश आदि अनेकों देशों में फैला है | इन देशों में विश्व की एक-तिहाई जनसंख्या निवास करती है इसलिए विश्व की दूसरी सबसे अधिक लोगों के द्वारा बोली जाने वाली भाषा है | इन देशो में हिंदी साहित्य अनेकों सम्मेलन-संगोष्टी आयोजित करती है फलस्वरूप भारतीय साहित्य सम्पर्कभाषा, राजभाषा और राष्ट्रभाषा से संज्ञापित हुई है और ग्लोबलाइजेशन की भाषा बन गई है |

  भारतीय साहित्य की इतिहास और परम्परा बहुत ही प्राचीन है | भारतीय साहित्य अलिखित, लिखित तथा वेदों से शुरू होकर लौकिक ग्रन्थ रामायण, महाभारत, श्रीमदभागवतगीता, पुराण, उपनिषद् मेघदुतम, कुमारसंभवम, गीत-गोविन्द, हितोपदेश, पंचतन्त्र, बोद्ध और जैन विद्वान्नों के द्वारा रचित पाली, प्राकृत, अपभ्रंश भाषा के रचनाएँ, नाथ-सिद्ध साधकों की योग व् साधना की ग्रन्थों, रासों की वीराख्यांक काव्य धारा, सगुण-निर्गुण के धर्म व् ब्रह्म की सिद्धांत, रहीम व् वृन्द की नीतिपरक दोहे, आधुनिक काल के नव-जागरण युग की साहित्य साकेत, प्रियप्रवास, कामायनी, गोदान, जूठन, एक यात्रा यह भी, आदि जीवनोपयोगी साहित्य की परम्परा है |

भारतीय साहित्य बहुविषयक भावना से प्रेरित है | भारतीय साहित्य की बहुविषयक में विज्ञान, साहित्य, इतिहास, ज्योतिष, गणित, समाज, भुगोल, कामशास्त्र, राजनीति, दर्शन, तर्कशास्त्र, अर्थशास्त्र आदि भाव से विकास की निरंतर गति में अग्रसर है | ये सभी विषय विश्व साहित्य को मार्गदर्शन का कार्य करती है | भारतीय साहित्य के गणित की दशमलव पद्धति, दर्शन व् ज्योतिष, व्याकरण-कोश ग्रन्थ, कृषि की वैदिक पद्धति वर्तमान में विश्व को प्रगति की आईना दिखाने की कार्य करती है | इनके आलावे भारतीय साहित्य की संगीत, नृत्य, खेल, विश्व साहित्य के बीच विशिष्ठ पहचान रखती है |

भारतीय साहित्य का रूप-स्वरूप व् कलात्मकता की दृष्टि से अप्रतिम स्थान है | साहित्य गद्य-पद्य के आलावे प्रबंध, खंडकाव्य, लघुकथा, यात्रा-वृतांत, निबन्ध, कहानी, जीवनी, उपन्यास, पत्र-पत्रिकाएँ, नाटक आदि रूपों में पाई जाती है | इनके आलावे विशिष्ठ अलंकारिक, रसात्मकता की योजना, सग्राहय शब्द-शक्ति, प्रभावाव्यंजक संगीतात्मकता, व परम्परा से युक्त है | कोई विशाल कथात्मकता में प्रसिद्ध है तो कोइ लघुकथा में साथ ही कोई तो विश्व के महान महापुरुष के जीवनी से और कोई विज्ञानं की तर्क व सिद्धांत से |

भारतीय साहित्य बहुभाषिक भावना से बंधी हुई है | साहित्य की भाषा संस्कृत, पालि, प्राकृत, अपभ्रंश, हिंदी, उर्दू, फारसी, ब्रज, अवधी, मैथिल, बंगला, उड़िया, असमिया, तमिल, मराठी, गुजराती, पंजाबी, बिहारी, नागपुरी, खोरठा, कुरमाली आदि अनेकों ठेठ व् परिमार्जित भाषा और बोली के रूप में हैं | भारतीय भाषा संस्कृत को तो भाषाओँ की जननी से संज्ञापित की जाती है |

भारतीय साहित्य उदात्त मानवीय चेतना से गर्वित है | यह विश्व के दुसरे साहित्य को उदात्त मानवीय चेतना के लिए सीख देती है | भारतीय साहित्य के गर्भ में सत्य शिवम सुन्दरम्, अहिंसा परम धर्म:, कर्म ही सफलता की कुंजी है, नर सेवा नारायण सेवा, वसुधैव कुटुम्बकम आदि मानवीय चेतना के मूल मन्त्र विद्यमान हैं | ऐसी उदात्त भावना की चेतना विश्व साहित्य में विरले ही पाई जाती है, इसलिए तो भारत जैसे देश को “विश्व गुरु” के उपाधि से नवाजा गया है | 

यहाँ की साहित्य लोकतान्त्रिक चेतना को संवरण करती है, मानव में हमेशा भाई-चारा व् विश्वास की भावना से हमेशा प्रेरित करते रहती है | यह लोगों को सिखाती है कि “सत्यमेव जयते” अर्थात् सत्य के रास्ते चलकर ही विजय प्राप्त की जा सकती है | फिर, विश्व के शक्तिशाली राष्ट्रों को शांति के लिए “पंचशील सिद्धांत” से प्रेरित की |

 भारतीय साहित्य ने मानव समुदाय के बीच उदात्त सांस्कृतिक भावना से प्रेरित करने के लिए समाज में परस्परिक नाते-रिश्ते की भावना भरी है, समाज में हम किसी को चाचा, भतीजा, भाई, बहन, फुआ, दादा-दादी, नाना-नानी, मित्र जैसे रिश्ते का सूत्र दिखाई है |

 हमारी सभ्यता वैयतिक नहीं बल्कि समष्टि है, हम सेवा भावना से ही जीवन को संचारित करते है जिसको भारतीय साहित्य के विद्वानों ने एक सूत्र में “धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष” के रूप में पुरुषार्थ के रूप में पहचान दी है|

निष्कर्षत: भारतीय साहित्य को विश्व भर के अन्य देश के साहित्य के लिए गुरु के समान माना जाना चाहिए | इसकी उदात्त की भावना हमें लोकरक्षक, लोकप्रेरक, लोकनायक जैसे व्यापक उपाधि प्राप्त करने में कोइ कसर नहीं छोडती है, अंतत: हम कहेंगे की भारतीय साहित्य विश्व भर के साहित्य के लिए प्रेरक प्राप्ति करने की अमूल्य निधि है |  


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