पत्रकारिता के प्रकार व कार्य
आज इसका क्षेत्र बहुत व्यापक हो चुका है
और विविधता भी लिए हुए है। शायद ही कोई क्षेत्र बचा हो जिसमें पत्रकारिता की
उपादेयता को सिद्ध न किया जा सके। इसलिए यह कहना अतिशयोक्ति न होगी कि आधुनिक युग
में जितने भी क्षेत्र हैं सबके सब पत्रकारिता के भी क्षेत्र हैं, चाहे वह
राजनीति हो या न्यायालय या कार्यालय, विज्ञान हो या प्रौद्योगिकी हो या शिक्षा, साहित्य हो
या संस्कृति या खेल हो या अपराध, विकास हो या कृषि या गांव, महिला हो या
बाल या समाज, पर्यावरण हो या अंतरिक्ष या खोज। इन सभी क्षेत्रों में पत्रकारिता की
महत्ता एवं उपादेयता को सहज ही महसूस किया जा सकता है।
दूसरी बात यह कि लोकतंत्र में इसे चौथा
स्तंभ कहा जाता है। ऐसे में इसकी पहुंच हर क्षेत्र में हो जाता है। इस बहु आयामी
पत्रकारिता के कितने प्रकार हैं उस पर विस्तृत रूप से चर्चा की जा रही है।
- खोजी पत्रकारिता
- वाचडाग पत्रकारिता
- एडवोकेसी
पत्रकारिता
- पीत पत्रकारिता
- पेज थ्री
पत्रकारिता
- खेल पत्रकारिता
- महिला पत्रकारिता
- आर्थिक पत्रकारिता
- ग्रामीण एवं कृषि
पत्रकारिता
- रेडियो पत्रकारिता
- व्याख्यात्मक
पत्रकारिता
- विकास पत्रकारिता
- संसदीय पत्रकारिता
- टेलीविजन
पत्रकारिता
- विधि पत्रकारिता
- फोटो पत्रकारिता
- विज्ञान
पत्रकारिता
- शैक्षिक
पत्रकारिता
- सांस्कृतिक-साहित्यिक
पत्रकारिता
- अपराध पत्रकारिता
- राजनैतिक
पत्रकारित
1. खोजी पत्रकारिता
खोजी पत्रकारिता वह है जिसमें आमतौर पर
सार्वजनिक महत्व के मामले जैसे भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और
गड़बड़ियों की गहराई से छानबीन कर सामने लाने की कोशिश की जाती है। स्टिंग ऑपरेशन
खोजी पत्रकारिता का ही एक नया रूप है। खोजपरक पत्रकारिता भारत में अभी भी अपने
शैशव काल में है।
2. वाचडाग
पत्रकारिता
इसका मुख्य
कार्य सरकार के कामकाज पर निगाह रखना है और कहीं भी कोई गड़बड़ी हो तो उसका
पर्दाफाश करना है। इसे परंपरागत रूप से वाचडाग पत्रकारिता
कहा जा सकता है।
3. एडवोकेसी
पत्रकारिता
एडवोकेसी यानि पैरवी करना। किसी खास
मुद्दे या विचारधारा के पक्ष में जनमत बनाने के लिए लगातार अभियान चलानेवाली
पत्रकारिता को एडवोकेसी पत्रकारिता कहा जाता है। मीडिया व्यवस्था का ही एक अंग है।
और व्यवस्था के साथ तालमेल बिठाकर चलनेवाले मीडिया को मुख्यधारा मीडिया कहा जाता
है। दूसरी ओर कुछ ऐसे वैकल्पिक सोच रखनेवाला मीडिया होते हैं जो किसी विचारधारा
या किसी खास उद्देश्य की पूर्ति के लिए निकाले जाते हैं। इस तरह की पत्रकारिता
को एडवोकेसी (पैरवी) पत्रकारिता कहा जाता है। जैसे राष्ट्रीय विचारधारा, धार्मिक
विचारधारा से जुड़े पत्र पत्रिकाएँ।
4. पीत
पत्रकारिता
पाठकों को लुभाने के लिए झूठी अफवाहों, आरोपों
प्रत्यारोपों प्रेम संबंधों आदि से संबंधित सनसनीखेज समाचारों से संबंधित
पत्रकारिता को पीत पत्रकारिता कहा जाता है। इसमें सही समाचारों की उपेक्षा करके
सनीसनी फैलाने वाले समाचार या ध्यान खींचने वाला शीर्षकों का बहुतायत में प्रयोग
किया जाता है। इसे समाचार पत्रों की बिक्री बढ़ाने, इलेक्ट्रिनिक
मीडिया की टीआरपी बढ़ाने का घटिया तरीका माना जाता है। इसमें किसी
समाचार खासकर ऐसे सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति द्वारा किया गया कुछ
आपत्तिजनक कार्य, घोटाले आदि को बढ़ाचढ़ाकर सनसनी बनाया जाता है। इसके अलावा पत्रकार द्वारा
अव्यवसायिक तरीके अपनाए जाते हैं।
5. पेज
थ्री पत्रकारिता
पजे थ्री पत्रकारिता उसे कहते हैं जिसमें
फैशन, अमीरों की पार्टियों महिलाओं और जानेमाने लोगों के निजी जीवन के बारे में
बताया जाता है।
6. खेल
पत्रकारिता
खेल से जुड़ी पत्रकारिता को खेल
पत्रकारिता कहा जाता है। खेल आधुनिक हों या प्राचीन खेलों में होनेवाले अद्भुत
कारनामों को जग जाहिर करने तथा उसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने में खेल पत्रकारिता
का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आज पूरी दुनिया में खेल यदि लोकप्रियता के शिखर पर
है तो उसका काफी कुछ श्रेय खेल पत्रकारिता को भी जाता है।
7. महिला
पत्रकारिता
पत्रकारिता के क्षेत्र में महिलाओं की
भागिदारी भी देखी जाने लगी है। दूसरी बात यह है कि शिक्षा ने महिलाओं को अपने
अधिकारों के प्रति जागरूक बनाया है। अब महिलाएं भी अपने करियर के प्रति सचेत हैं।
महिला जागरण के साथ साथ महिलाओं के प्रति अत्याचार और अपराध के मामले भी बढ़े हैं।
महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुत सारे कानून बने हैं। महिलाओं को
सामाजिक सुरक्षा दिलाने में महिला पत्रकारिता की अहम भूमिका रही है। आज महिला
पत्रकारिता की अलग से जरूरत ही इसलिए है कि उसमें महिलाओं से जुड़े हर पहलू पर गौर
किया जाए और महिलाओं के सवार्ंगीण विकास में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।
8. आर्थिक
पत्रकारिता
आर्थिक पत्रकारिता में व्यक्तियों
संस्थानों राज्यों या देशों के बीच होनेवाले आर्थिक या व्यापारिक संबंध के
गुण-दोषों की समीक्षा और विवेचन की जाती है।
9. ग्रामीण
एवं कृषि पत्रकारिता
भारत में आज भी
लगभग 70 प्रतिशत आबादी गांवों में बसती है। देश के बजट प्रावधानों का बड़ा हिस्सा
कृषि एवं ग्रामीण विकास पर खर्च होता है। ग्रामीण विकास के बिना देश का विकास
अधूरा है। ऐसे में आर्थिक पत्रकारिता का एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वह कृषि
एवं कृषि आधारित योजनाओं तथा ग्रामीण भारत में चल रहे विकास कार्यक्रम का सटीक
आकलन कर तस्वीर पेश करें।
10. रेडियो
पत्रकारिता
मुद्रण के आविष्कार के बाद संदेशा और
विचारों को शक्तिशाली आरै प्रभावी ढंग से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचना मनुष्य का
लक्ष्य बन गया। इसी से रेडियो का जन्म हुआ। रेडियो के आविष्कार के जरिए आवाज एक ही
समय में असंख्य लोगों तक उनके घरों को पहुंचने लगा। इस प्रकार श्रव्य माध्यम के
रूप में जनसंचार को रेडियो ने नये आयाम दिए। आगे चलकर रेडियो को सिनेमा और
टेलीविजन और इंटरनेट से कडी चुनौतियां मिली लेकिन रेडियो अपनी विशिष्टता के कारण
आगे बढ़ता गया और आज इसका स्थान सुरक्षित है। रेडियो की
विशेषता यह है कि यह सार्वजनिक भी है और व्यक्तिगत भी।
11. व्याख्यात्मक
पत्रकारिता
पत्रकार से अपेक्षा की जाती है कि वह
घटनाओं की तह तक जाकर उसका अर्थ स्पष्ट करे और आम पाठक को बताए कि उस समाचार का
क्या महत्व है। पत्रकार इस महत्व को बताने के लिए विभिन्न प्रकार से उसकी व्याख्या
करता है। इसके पीछे क्या कारण है। इसके पीछे कौन था और किसका हाथ है। इसका परिणाम
क्या होगा। इसके प्रभाव से क्या होगा आदि की व्याख्या की जाती है। साप्ताहिक
पत्रिकाओं संपादकीय लेखों में इस तरह किसी घटना की जांच पड़ताल कर व्याख्यात्मक
समाचार पेश किए जाते हैं। टीवी चैनलों में तो आजकल यह ट्रेडं बन
गया है कि किसी भी छोटी सी छोटी घटनाओं के लिए भी विशेषज्ञ पेनल बिठाकर उसकी
सकारात्मक एवं नकारात्मक व्याख्या की जाने लगी है।
12. विकास
पत्रकारिता
सरकारी योजनाओं से देश का विकास हो रहा
है या नहीं उसका आकलन करना ही विकास पत्रकारिता का कार्य है। विकास पत्रकारिता के
जरिए ही इसमें यथा संभव सुधार लाने का मार्ग प्रशस्त होगा।
13. संसदीय
पत्रकारिता
लोकतंत्र में संसदीय व्यवस्था की प्रमुख
भूमिका है। संसदीय व्यवस्था के तहत संसद में जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि
पहुंचते हैं। बहुमत हासिल करने वाला शासन करता है ताे दूसरा विपक्ष में बैठता है।
दानेों की अपनी अपनी अहम भूमिका होती है। इनके द्वारा किए जा रहे कार्य पर नजर
रखना पत्रकारिता की अहम जिम्मेदारी है क्योंकि लोकतंत्र में यही एक कड़ी है जो
जनता एवं नेता के बीच काम करता है। जनता किसी का चुनाव इसलिए करते हैं तो वह
लोगों की सुख सुविधा तथा जीवनस्तर सुधारने में कार्य करे। लेकिन चुना हुआ
प्रतिनिधि या सरकार अगर अपने मार्ग पर नहीं चलते हैं तो उसको चेताने का कार्य
पत्रकारिता करती है। इनकी गतिविधि, इनके कार्य की निगरानी करने का कार्य
पत्रकारिता करती है।
14. टेलीविजन
पत्रकारिता
मनोरंजन के क्षेत्र में फिल्मों से
संबंधित कार्यक्रम, नाटक, धारावाहिक, नृत्य, संगीत तथा मनोरंजन के विविध कार्यक्रम शामिल हैं। इन कार्यक्रमों का प्रमुख
उद्देश्य लोगों का मनोरंजन करना है। शिक्षा क्षेत्र में टेलीविजन की महत्वपूर्ण
जिम्मेदारी है।
15. विधि
पत्रकारिता
नए कानून, उनके अनुपालन और
उसके प्रभाव से लोगों को परिचित कराना बहुत ही जरूरी है। कानून व्यवस्था बनाए रखना, अपराधी को
सजा देना से लेकर शासन व्यवस्था में अपराध रोकने, लोगों को न्याय
प्रदान करना इसका मुख्य कार्य है। इसके लिए निचली अदालत से लेकर उच्च न्यायालय, सर्वोच्च
न्यायालय तक व्यवस्था है। इसमें रोजाना कुछ न कुछ महत्वपूर्ण फैसले सुनाए जाते
हैं। कई बड़ी बड़ी घटनाओं के निर्णय, उसकी सुनवाई की प्रक्रिया चलती रहती है।
इस बारे में लोग जानने की इच्छुक रहते हैं, क्योंकि कुछ
मुकदमे ऐसे होते हैं जिनका प्रभाव समाज, संप्रदाय, प्रदेश एवं
देश पर पड़ता है। दूसरी बात यह है कि दबाव के चलते कानून व्यवस्था अपराधी को छोड़कर निर्दोष
को सजा तो नहीं दे रही है इसकी निगरानी भी विधि पत्रकारिता करती है।
16. फोटो
पत्रकारिता
फोटो पत्रकारिता ने छपाई तकनीक के विकास
के साथ ही समाचार पत्रों में अहम स्थान बना लिया है। कहा जाता है कि जो बात हजार
शब्दांे में लिखकर नहीं की जा सकती है वह एक तस्वीर कह देती है।
17. विज्ञान
पत्रकारिता
वर्तमान में विज्ञान ने काफी तरक्की कर
ली है। इसकी हर जगह पहुंच हो चली है। विज्ञान में हमारी जीवन शैली को बदलकर रख
दिया है। वैज्ञानिकों द्वारा रोजाना नई नई खोज की जा रही है। इसमें कुछ तो जन
कल्याणकारी हैं तो कुछ विध्वंसकारी भी है। जैसे परमाणु की खोज से कई बदलाव ला दिया
है लेकिन इसका विध्वंसकारी पक्ष भी है। इसे परमाणु बम बनाकर उपयोग करने से विध्वंस
हागेा। इस तरह विज्ञान पत्रकारिता दोनों पक्षों का विश्लेषण कर उसे पेश करने का
कार्य करता है। जहां विज्ञान के उपयोग से कैसे जीवन शैली में सुधार आ सकता है तो
उसका गलत उपयोग से संसार ध्वंस हो सकता है।
18. शैक्षिक
पत्रकारिता
पत्रकारिता सभी नई सूचना को लोगों तक
पहुंचाकर ज्ञान में वृद्धि करती है। जब से शिक्षा को औपचारिक बनाया गया है तब से
पत्रकारिता का महत्व और बढ़ गया है। जब तक हमें नई सूचना नहीं मिलेगी हमें तब तक
अज्ञानता घेर कर रखी रहेगी। उस अज्ञानता को दूर करने का सबसे बड़ा माध्यम है
पत्रकारिता। चाहे वह रेडियो हाे या टेलीविजन या समाचार पत्र या पत्रिकाएं सभी में
नई सूचना हमें प्राप्त हातेी है जिससे हमें नई शिक्षा मिलती है। एक बात आरै कि
शिक्षित व्यक्ति एक माध्यम में संतुष्ट नहीं होता है। वह अन्य
माध्यम को भी देखना चाहता है। यह जिज्ञासा ही पत्रकारिता को बढ़ावा देता है तो
पत्रकारिता उसकी जिज्ञासा के अनुरूप शिक्षा एवं ज्ञान प्रदान कर उसकी जिज्ञासा को
शांत करने का प्रयास करता है। इसे पहुंचाना ही शैक्षिक पत्रकारिता का कार्य है।
19. सांस्कृतिक-साहित्यिक
पत्रकारिता
मनुष्य में छिपी प्रतिभा, कला चाहे वह
किसी भी रूप में हो उसे देखने से मन को तृप्ति मिलती है। इसलिए मनुष्य हमेशा नई नई
कला, प्रतिभा की खोज में लगा रहता है। इस कला प्रतिभा को उजागर करने का एक सशक्त
माध्यम है पत्रकारिता। कला प्रतिभाओं के बारे में जानकारी रखना, उसके बारे
में लोगों को पहुंचाने का काम पत्रकारिता करता है। इस सांस्कृतिक साहित्यिक
पत्रकारिता के कारण आज कई विलुप्त प्राचीन कला जैसे लोकनृत्य, लोक संगीत, स्थापत्य
कला को खोज निकाला गया है और फिर से जीवित हो उठे हैं। दूसरी ओर
भारत जैसे विशाल और बहु सांस्कृतिक वाले देश में सांस्कृतिक साहित्यिक पत्रकारिता
के कारण देश की एक अलग पहचान बन गई है। कुछ आंचलिक लोक नृत्य, लोक संगीत
एक अंचल से निकलकर देश, दुनिया तक पहचान बना लिया है। समाचार पत्र एवं पत्रिकाएं प्रारंभ से ही
नियमित रूप से सांस्कृतिक साहित्यिक कलम को जगह दी है। इसी तरह चैनलों पर भी
सांस्कृतिक, साहित्यिक समाचारों का चलन बढ़ा है।
20. अपराध
पत्रकारिता
राजनीतिक समाचार के बाद अपराध समाचार ही महत्वपूर्ण होते हैं। बहुत से पाठकों व दर्शकों को अपराध समाचार जानने की भूख होती है। इसी भूख को शांत करने के लिए ही समाचारपत्रों व चैनलों में अपराध डायरी, सनसनी, वारदात, क्राइम फाइल जैसे समाचार कार्यक्रम प्रकाशित एवं प्रसारित किए जा रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार किसी समाचार पत्र में लगभग पैंतीस प्रतिशत समाचार अपराध से जुड़े हातेे हैं। इसी से अपराध पत्रकारिता को बल मिला है। दूसरी बात यह कि अपराधिक घटनाओं का सीधा संबंध व्यक्ति, समाज, संप्रदाय, धर्म और देश से हातेा है। अपराधिक घटनाओं का प्रभाव व्यापक हातेा है। यही कारण है कि समाचार संगठन बड़े पाठक दर्शक वर्ग का ख्याल रखते हुए इस पर विशेष फोकस करते हैं।
21. राजनैतिक
पत्रकारिता
समाचार पत्रों में सबसे अधिक पढ़े
जानेवाले आरै चैनलों पर सर्वाधिक देखे सुने जानेवाले समाचार राजनीति से जुड़े होते
हैं। राजनीति की उठा पटक, लटके झटके, आरोप प्रत्यारोप, रोचक
रोमांचक, झूठ-सच, आना जाना आदि से जुड़े समाचार सुर्खियों में होते हैं। राजनीति से जुड़े
समाचारों का पूरा का पूरा बाजार विकसित हो चुका है। राजनीतिक समाचारों के बाजार
में समाचार पत्र और समाचार चैनल अपने उपभेक्ताओं को रिझाने के लिए नित नये प्रयोग
करते नजर आ रहे हैं। चुनाव के मौसम में तो प्रयोगों की झंडी लग जाती है और हर कोई
एक दूसरे को पछाड़कर आगे निकल जाने की होड़ में शामिल हो जाता है। राजनीतिक
समाचारों की प्रस्तुति में पहले से अधिक बेबाकी आयी है। लोकतंत्र की दुहाई के साथ
जीवन के लगभग हर क्षेत्र में राजनीति की दखल बढ़ा है और इस कारण राजनीतिक समाचारों
की भी संख्या बढ़ी है। ऐसे में इन समाचारों को नजरअंदाज कर जाना संभव नहीं है।
पत्रकारिता के कार्य
पत्रकारिता का कार्य समय के अनुसार बदल
गया है। प्रारंभिक काल में इसका मुख्य कार्य था नए विचार का प्रचार करना। तकनीकी
विकास, परिवहन व्यवस्था में विकास, उद्योग एवं वाणिज्य के प्रसार के कारण आज
पत्रकारिता एक उद्योग बन चुका है। आज पत्रकारिता का मुख्य कार्य सूचना प्रदान करना, शिक्षा
प्रदान करने, लोगों का मनोरंजन करना, जनमत को आकार देना, लोकतंत्र की
रक्षा करना। मनुष्य जिज्ञासु है। उसका नई नई चीजो के बारे में, घटनाओं के
बारे में ताजा जानकारी रखना सहज स्वभाव है। घटनाओं की सूचना प्रदान करते हुए
पत्रकारिता इस जिज्ञासा को शांत करने का काम करता है। पुस्तक का ज्ञान सीमित होता
है दूसरी आरे संसार में हर क्षेत्र मे नए बदलाव आते रहते हैं। मनुष्य शिक्षित होने
के बाद उसके आगे की जानकारी हासिल करना चाहता है तथा अन्य क्षेत्र की भी जानकारी
हासिल करना चाहता है। यह नए ज्ञान उसे पत्रकारिता के माध्यम से ही मिल पाता है। इस
तरह पत्रकारिता न केवल सूचना प्रदान करता है बल्कि पाठक, दर्शक एवं
श्रोता को सीधे एवं अनौपचारिक रूप से शिक्षा प्रदान करने का कार्य करती है। पत्रकारिता
यानी मीडिया लोगों के मध्य जागरूकता लाने का एक सशक्त माध्यम है। इस लोकतांत्रिक व्यवस्था मे
इसका एक बड़ा कार्य है लोकतंत्र की रक्षा करना। चूिंक यह सत्ता एवं जनता के बीच एक
कड़ी है तो लोकतंत्र की सुरक्षा एवं बचाव का यह सबसे बड़ा माध्यम है। एक बात और आज
की स्थिति में मीडिया ही सरकार और जनता का एजेडं ा तय करने लगा है। मीडिया में जो
मुद्दा बन गया है वह सरकार एवं जनता का मुद्दा बनता जा रहा है।
निष्कर्ष - राजनीतिक समाचारों की आकर्षक प्रस्तुति लोकप्रिया हासिल करने का
बहुत बड़ा साधन बन चुकी है। पत्रकारिता का इतिहास चाहे कितना पुराना हो या नया
लेकिन 21वीं शताब्दी में यह एक ऐसा सशक्त विषय के रूप में उभरा है जिसकी पहुंच
अकल्पनीय बन गई है। आज इसका क्षेत्र बहुत व्यापक हो चुका है और विविधता भी लिए हुए
है। शायद ही कोई क्षेत्र बचा हो जिसमें पत्रकारिता की उपादेयता को सिद्ध न किया जा
सके। इसलिए यह कहना अतिशयोक्ति न होगी कि आधुनिक युग में जितने भी क्षेत्र हैं
सबके सब पत्रकारिता के भी क्षेत्र हैं, चाहे वह राजनीति
हो या न्यायालय या कार्यालय, विज्ञान हो या प्रौद्योगिकी हो या शिक्षा, साहित्य हो या
संस्कृति या खेल हो या अपराध, विकास हो या कृषि या गांव, महिला हो या
बाल या समाज, पर्यावरण हो या अंतरिक्ष या खोज। इन सभी
क्षेत्रों में पत्रकारिता की महत्ता एवं उपादेयता को सहज ही महसूस किया जा सकता
है। दूसरी ओर लोकतंत्र में इसे चौथा स्तंभ का दर्जा मिलने के कारण तथा इसकी पहुंच
हर क्षेत्र में होने के कारण यह बहु आयामी बन गई है।
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