अमीर खुसरो के काव्य/रचनाओं की विशेषता
अमीर खुसरो आदिकालीन खड़ी बोली हिन्दी भाषा
साहित्य के प्रवर्तक साहित्यकार हैं | इन्होंने काव्य भाषा में आम –जनों के भाषा
के साथ उर्दू-फारसी शब्दों को मिलाकर खड़ी बोली हिन्दी के रूप में प्रतिष्ठित किया
| इस प्रकार काव्य भाषा में परम्परा से संस्कृत, पालि, प्राकृत, अपभ्रंश, अवहट्ट
के बाद खड़ी बोली हिन्दी के रूप में आने लगी | साथ ही काव्य के विषय पछ में दरबारी
काव्यों के साथ सम्प्रदाय निरपेक्ष लौकिक साहित्य दृष्टिगोचर हुई |आधुनिक हिन्दी
भाषा साहित्यकारों ने निम्न प्रकार के विशेषताओं को पाया है –
1. आम-जन के विषयक काव्य –
अमीर के पूर्व या समकाल में
साहित्यकार दरवारी, धार्मिक, सम्प्रदायों से सम्बन्धित विषयक रचनाएँ होते थे |
अमीर ने काव्य के विषय पछ को साधारण जन से सम्बन्धित तत्व जैसे – दर्पण, पान,
बादल, आकाश, आदि को स्थान दिया | यथा –
अरथ तो
इसका बुझेगा | मूँह देखो तो सूझेगा ||
-दर्पण
2. उक्ति-वैचित्रता
– अमीर के काव्य में उक्ति –वैचित्रता की प्रधान्य है | अपनी विषय को कुतुहुलता के
साथ लेट हैं , जिससे उक्ति वैचित्रता की कला और ही गहराई के साथ पाठक के मानस
ह्रदय में उभर आती है | विषय में उक्ति-वैचित्रता इतनी है कि कविता पाठक से कोई
उत्तर की प्राप्ति के लिये ललायित रहता है | जैसे –
एक थाल मोटी से भरा |
सबके सिर पर औंधा धरा ||
चारों ओर वह थाली फिरे |
मोती उससे एक न गिरे || -आकाश
3. मसनवी पद्धति का विकास
– मसनवी पद्धति उर्दू साहित्य की
प्रधान विधा है पर हिन्दी साहित्य में उर्दू से ही आयी है | माना जाय तो अमीर
खुसरो ने ही इसे हिन्दी में प्रवर्तन किया | मसनवी यानि नायिका द्वारा प्रेम की
चाहत में नायक के प्रति सदैव चिन्तामग्न होकर अकेली सोचते रहना है| आधुनिक
साहित्यकारों ने हिन्दी साहित्य में मसनवी को मनोवैज्ञानिकता का सबसे अच्छा उदाहरण
प्रस्तुत किया|
4. रहस्यात्मकता
- अमीर खुसरो के काव्य काव्य रहस्य भावना
के पहले द्रष्टा हैं | इनके काव्य वैचित्रता व कुतुहुलता से रहस्यवाद को पैदा करते
हैं | रहस्यता की झाँकी अमीर ने गुरु निजामुद्दीन के बीच प्रेम की अभिव्यक्ति में
सटीक रूप से उपस्थित किया है | सच कहा जाय तो हिन्दी साहित्येतिहास में
आध्यात्मिकता के कविता में रहस्य भावना का सर्वप्रथम प्रवर्तन किया है |इसमें
आदिकालीन नाथ, सिद्ध कवि के साथ-साथ सम्प्रदाय निरपेच्छ धारा के कवियों का भी
योगदान रहा है |
5. खड़ी बोली हिन्दी को प्रतिष्ठित साहित्य भाषा की दर्जा
– अमीर
खुसरो के पहले प्रतिष्ठित साहित्य की भाषा संस्कृत, पालि, प्राकृत. अपभ्रंश तथा
अवहट्ट था | पर अमीर ऐसे साहित्यकार निकले जिन्होंने आमजनताओं के बीच के भाषा को
काव्य का दर्जा दिया इसलिए अमीर को खड़ी बोली हिन्दी भाषा के प्रवर्तक के रूप में
माना जाता है |
6. तुकबन्दियां
– अमीर खड़ी बोली हिन्दी भाषा काव्य के जनक हैं | इन्होंने इस भाषा को काव्य के
भाषा के तौर पर इतनी प्रतिष्ठित किया कि काव्य में तुकबंदियों का एक विशेष कला उभर
आयी | इस कला को भक्तिकालीन, रीतिकालीन कवियों ने प्रधान कला के रूप में स्वीकार
किया |
7. रसीले गीत और दोहे
–अमीर खुसरो संगीतज्ञ भी थे | प्रसिद्ध वादक तबले का विकास सर्वप्रथम किया था |
अत: संगीत के इस ज्ञाता ने नाथ और सिद्ध सम्प्रदाय के अरसीले तत्वों से मुक्त करके
लौकिकता में भी अलौकिकता के विषय को रसीले दंढंग से प्रस्तुति दी |
8. मनोरंजनात्मक काव्य
– हिन्दी साहित्य में आदिकालीन
हिन्दी साहित्य दरवारों के लिये ही लिखे जाते थे | राज्य के आम-जनताओं या साधारण
लोगों के लिये नहीं होते थे | इस पृष्ठिभूमि में अमीर खुसरो ही सर्वप्रथम ऐसे कवि
साहित्यकार हैं जिसने साधारण जनों के लिये लिखा जिससे आम-आदमी भी साहित्य के रस को
पान करने लगे | खुसरो के काव्य के प्रधान तत्व वैचित्र्यता, कुतुहल, रहस्यात्मकता,
मसनवी आदि तत्वों को समझ-समझकर मनोरंजन करने लगे |
9. भाषा कोशीय ग्रन्थ के संथापक
– अमीर खुसरो साहित्य में कुतुहल,
विचित्र्यता,रहस्य. मसनवी आदि भावों की स्थापना ही नहीं किया बल्कि खलिकबारी जैसे
कोशीय ग्रन्थ की रचना करके हिन्दी भाषा में उर्दू-फारसी के शब्दों को समिश्रण करने
में सहुलियत प्रदान की है |
10. नवीन छंदों के संस्थापक
– अमीर ने गजल, मुकरी, गीत
आदि नवीन छंदों की स्थापना दी है | आधुनिक काल में ये छंद सबसे प्रचलित और
लोकप्रिय छंद में हैं |
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