Sunday, March 20, 2022

जैव – विविधता एवं इसका संरक्षण / jaiv vividhta evn eska sanrkshn

 

                                     जैव विविधता एवं इसका संरक्षण

-          वाल्टर जी राँसेन 1986 में सर्वप्रथम जैव विविधता शब्द का प्रयोग किया था

-          परिस्थितिकी तंत्र में जीवों समुदायों के बीच पारस्परिक क्रिया होती है

-          पारिस्थितिकी विविधता जैव क्षेत्र की जलवायु और आवास के स्वरूप पर निर्भर करती है

-          विश्व की 2.4% भूमि भारत के अंतर्गत है और यह क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा देश है

-          यह उत्तर से दक्षिण 3214 कि० मी० तथा पूर्व से पशिचम 2933 कि० मी० दुरी तक फैला हुआ है, इसका कुल क्षेत्रफल 3,287,263 वर्ग कि० मी० है !

-          भारत वन्यजीव संस्थान के वर्त्तमान वर्गीकरण के आधार पर 10 वृहद जैव भौगोलिक क्षेत्र में प्रदर्शित किया जाता है – 1.ट्रान्स हिमालयी क्षेत्र 2.हिमालयी क्षेत्र 3.सब मान्टेन या निचला क्षेत्र 4.शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र 5.पशिचमी घाट 6.दक्कन पठार क्षेत्र 7.गंगा का मैदानी क्षेत्र 8.उत्तर पूर्वी भारत 9.प्रायद्वीप 10.समुद्र तट


-          जैव विविधता का महत्त्व – 1. पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन बनाये रखना ! 2.पौधे प्रकाश संश्लेषन की क्रिया द्वारा वातावरण को शुद्ध बनाये रखते हैं और श्वसन के लिए आवश्यक आक्सीजन प्रदान करते हैं ! 3.जैव मण्डल में गैसीय एवं खनिजों के संतुलन को बनाये रखना !4.मृदा निर्माण एवं उसकी उत्पादकता को बनाये रखना ! 5.पानी के चक्र को सुनिश्चित करना एवं मृदा जल को बनाये रखना ! 6.प्रदूषकों का अवशोषण एवं जैविक विघटन ! 7.जलवायु का नियमन और इसकी दशा के निर्धारण में पौधों की महत्त्वपूर्ण भूमिका ! 8.वैकल्पिक मूल्य विभिन्न जातियाँ आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपना विशिष्ट महत्त्व रखती है ! नई प्रजातियों की खोज जैव विविधता की समृद्धि पर निर्भर रहती है ! जैव विविधता अनुवंषित स्रोतों के लिए एक आवश्यक आधार है इसके जिन बैंक एवं जर्मप्लाज्म को संरक्षित कर जैव तकनीकी द्वारा नई महत्त्वपूर्ण प्रजातियों का विकास किया जा रहा है !

-          तुलसी, पीपल, खेजरी, आदि की पूजा, मानव के सांस्कृतिक एवं धार्मिक विश्वासों से जुड़ी महत्त्वपूर्ण मान्यता जैव विविधता के महत्त्व से संबंध रखती है !

-          जैव विविधता के सबसे बड़े केंद्र के रूप में उष्णकटिबन्धीय क्षेत्र आते हैं, यहाँ जैव विविधता के कारण निम्न हैं -1 उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में गर्म ताप एवं उच्च आद्रता प्रदान करते हैं ! 2.ये क्षेत्र वर्ष भर अधिक प्रकाश ऊर्जा प्राप्त करते हैं ! 3.उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों की जलवायु शीतोष्ण क्षेत्रों की तुलना में अधिक स्थायित्व रखती है !4.प्रजनन की दर अधिक होती है

-          सोवियत रूस के वैज्ञानिक एन आय वैविलोन ने खोजा की फसली पौधों व पालतू जानवरों का उदभव उष्ण एवं उपोष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में हैं !

-          विश्व में 12 बड़े जैव विविधता वाले क्षेत्र हैं जिन्हें वैविलोवियन सेन्टर्स आँफ डाइवर्सिटीकहा जाता है ! इनको मैगाजीन सेन्टर्स भी कहा जाता है ! यह 60.70%हिस्सा विद्यमान है ! इस क्षेत्र में अधिकांश विकासशील देश आते हैं ! 1.मैक्सिको 2.कोलम्बिया 3.ब्राजील 4.पीरु 5.इक्वाडोर 6.जेर 7.मेडोगास्कर 8.मलेशिया 9.भारत 10.चीन    

-          जैव विविधता का सीधा सम्बन्ध क्षेत्र की जलवायु, मृदा संग्ठन, और भू-आकृति संरचना पर निर्भर है !

-          भारत में पूर्वोत्तर हिमालय क्षेत्र, उत्तर-पूर्व भारत, पशिचमी घाट, और अंडमान निकोबार प्रायद्वीप प्रमुख जैव विविधता के समृद्धि क्षेत्र हैं !

-          संसार के कुल भू-क्षेत्रफल का केवल 2.4%भारत में निहित है !फिर भी जैव विविधता में भारत का 8.22% योगदान है वैशिवक स्तर पर कुल जन्तु एवं पादप प्रजातियों का क्रमश: 7.31%और 10.88% भाग भारत में निहित है !

-          पादप जैव विविधता में भारत का विश्व में दसवां और एशिया में चौथा स्थान है ! स्तनधारी जन्तुओं की संख्या के आधार पर भारत का विश्व में दसवां स्थान है और उच्च कशेरुकी जन्तुओं की स्थानिक विशेष क्षेत्र जातियों एवं कृषि एवं पशु संवर्धन में जातियों की योगदान के संदर्भ में इसका विश्व में ग्यारहवां स्थान है !

-          भारत में लगभग 166 फसली पौधों और लगभग 320 फसली पौधों से सम्बन्धित जंगली पौधों की जातियों का उदभव और विकास हुआ, चाय, काफी, तम्बाकू,और गन्ने की जंगली जनजातियाँ हैं, चावल, गणना, जुट, आम, केला, बाजरा,कहना, ज्वार की जातियां  विभिन्न मसाले, एवं औषधि सजावटी पौधे का उदभव भारत ही है !फसल प्रजातियों में भारत का विश्व में सातवाँ स्थान है !

-          समुन्द्र क्षेत्र का विस्तार 7516.5 कि० मी० और इसके अतिरिक्त 202 मिलियन वर्ग किमी का आर्थिक क्षेत्र है !

-          विश्व जन्तु-भौगोलिक क्षेत्रों में भारत ओरियन्टल क्षेत्र में आता है !

-          नारमन मायर्स वर्ष 1988 में स्वसथाने द्वारा संरक्षण के लिए हाट स्पाटअवधारणा को विकशित किया !

-          हाट स्पाट पृथ्वी पर पौधों और जन्तुओं के सबसे समृद्ध और अधिक संकटापन्न भण्डार क्षेत्र हैं, सम्पूर्ण विश्व में संरक्ष्ण हेतु 25 स्थलीय हाट-स्पाट है, यह हाट-स्पाट भू-स्थल क्षेत्र का 1.4%भाग है ! मानव जनसंख्या का लगभग 20%हाट-स्पाट क्षेत्रों में रहते हैं !प्रकृति और प्राकृतिक स्रोतों के संरक्षण हेतु अन्तर्राष्ट्रीय संघ ने प्रजातियों की 8 “रेड लिस्टश्रेणी निर्धारण किये हैं !

-          रेड लिस्ट का उपयोग – 1. संकटापन्न जैव विविधता के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना 2. संकटापन्न प्रजातियों की पहचान एवं अभिलेख तैयार करना ! 3. जैव विविधता पतन की विश्वस्तरीय सूची प्रदान करना !4. संरक्षण की प्राथमिकताओं की स्थानीय स्तर पर परिभाषित करना और संरक्ष्ण प्रक्रिया का निर्देशन करना !

-          रेड लिस्ट के आधार पर जातियों को संरक्षण हेतु वैध स्तर पर पांच वर्गों में बाँटा गया है-1. विलुप्त वह जातियां जो अब लम्बे समय से न तो अपने स्थानीय आवास में और न खिन और पाई जाति है, जहाँ पहले पाये जाते थे उन्हें विलुप्त जाति कहते हैं जैसे डायनासोर, आर्किओप्टोरिस

2. संकटापन्न जातियाँ ऐसी प्रजातियाँ जो अब विलोपन के कगार पर हैं जैसे गैंडा, ग्रेटइंडियन बस्टर्स, काले गर्दन, वाला बगुला और एशियाटिक शेर !

3. प्रहार शुलभ ऐसी प्रजातियाँ निकट भविष्य में संकटापन्न हों सकती है भारतीय चीता, तितलियाँ आदि !

4. असाधारण जातियाँ वे जातियाँ जिनकी जनसंख्या घनत्त्व कम है और सीमित भौगोलिक क्षेत्र में पाई जाति हैं सफेद शेर

5. अपर्याप्त जानकारी वाली जातियाँ ये संरक्षण में है,परन्तु पर्याप्त जानकारी नहीं है !

*  जैव विविधता के खतरे  के कारण – 1. आवास क्षय एवं अपखंडन 2. विक्षोभ एवं प्रदुषण 3. विदेशज 4. मानव जनित विलोपन 5. विलोपन की भाव प्रवणता 6. वन्य जीव का शिकार

- मानव वन्यजीव विवाद के उपाय – 1. वन प्रबन्धन वनोत्पादन सामाजिक वानिकी आदि 2. वन्य जीव संरक्षण और वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 3. राष्ट्रीय पार्क और अभ्यारण्य 4. वन्य जीव पर अनाधिकार शिकार पर प्रतिबन्ध, सामाजिक जागुरुकता तथा स्वयंसेवी संग्ठन स्थापना !

- रेड डाटा बुक के अनुसार भारत में 1000 से अधिक प्राणी विलोपन से संकट ग्रस्त है, इसके अनुसार भारत का विश्व में भयग्रस्त स्तनधारी जन्तुओं के संदर्भ में दसवाँ स्थान, जबकि भयग्रस्त पक्षियों के संदर्भ में भारत का छठां स्थान है ! विश्व में 60,000 पौधे और 2000 जन्तु भयग्रस्त जातियों में पहचान है

- भारत की संकटापन्न पादप जातियाँ आर्किड्स की के जातियाँ, रोडोड़ेन्द्रान की जातियाँ, मैगनोलिया, ड्रसेरा, ! जन्तुओं में बाघ, शेर, घडियाल, गिद्ध, सारस, एल्वात्रस आदि

- विश्व में 37,000 संरक्षित क्षेत्र चिन्हित है, इसमें भारत में 581 सुरक्षित क्षेत्र जिसमें 89 राष्ट्रीय उद्यान एवं 492 वन्य अभयारण्य हैं, जिम कारबेट नेशनल पार्क भारत का सर्वप्रथम नेशनल पार्क है

- मेघालय की खासी पहाड़ियों में नेपेन्थीस के लिए, सिक्किम में रोडोड़ेन्द्रान एवं प्रिमुलस के लिए और मेघालय में सिट्रस मेघालय की खासी पहाड़ियों में नेपेन्थीस के लिए,!

- भारत में कुल 13 बायोस्फियर रिजर्व हैं, पहला बायोस्फियर रिजर्व 1986 में नीलगिरी बायोस्फियर रिजर्व स्थापित किया गया जो कर्नाटक, केरल व तमिलनाडु में फैला हुआ है,

-एक बायोस्फियर रिजर्व कोरबफर एवं ट्रान्सीजन क्षेत्रों में विभाजित रहता है,

    प्राकृतिक अथवा कोर’  क्षेत्र प्रतिनिधि पारिस्थितिक तंत्र का विलोभ-रहित क्षेत्र है,कोर क्षेत्र के बाहर का क्षेत्र बफर क्षेत्र होता है, यह शोध और शैक्षणिक क्रियाओं से सम्बन्धित है, ‘ट्रान्सीजनक्षेत्र बायोस्फियर रिजर्व का सबसे बाहरी क्षेत्र होता है यह संरक्षण प्रबन्धन और जन-सामान्य के मध्य सक्रिय सहयोग का क्षेत्र है इसमें वानिकी, कृषि,और अन्य आर्थिक उपयोगों एवं संरक्षण उद्देश्य के बीच सामांजस्य स्थापित रहता है !   

-          जिन बैंक में पादपों एवं जन्तुओं की संकटग्रस्त जातिओं के  DNA पदार्थ को संरक्षित कर एकत्रित किया जाता है, भारत में जीन बैंक स्थापित हैं शिमला अमरावती जोधपुर शिलांग में ! जीन बैंक में DNA को तरल-नाईट्रोजन में -196C ताप पर संरक्षण किया जाता है !

-          रिओं-डि-जनेरियों ब्राजीलमें पृथ्वी सम्मेलन 1992 में जैव विविधता पर 171 देशों ने जैव विविधता संरक्षण हेतु हस्ताक्षर किये !

                                                                                                                                                

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