Sunday, March 20, 2022

पर्यावरणीय प्रदुषण एवंम प्राकृतिक आपदाएं / pryavrn prdushn evn prakritik aapdae

                                           पर्यावरणीय प्रदुषण एवंम प्राकृतिक आपदाएं

                                        


-          प्रदुषण के दो प्रकार – 1. निम्नीकृत प्रदुषण, जैसे- मल मूत्र कूड़ा-करकट एवं पेड़ पौधों के हरे अथवा सूखे कार्बनिक पदार्थ आते हैं ! 2. अनिम्निकृत प्रदुषण, जैसे डी डी टी, प्लास्टिक, एल्युमिनियम,आर्सेनिक एवं अन्य धातुएँ आदि ! जीवन को प्रभावित करने वाले मुख्य प्रदुषण वायु प्रदुषण, जल प्रदुषण, मृदा प्रदुषण, ध्वनि प्रदुषण, उष्मीय प्रदुषण, नाभकीय प्रदुषण और ठोस अपशिष्ट प्रदुषण | भारत की सर्वाधिक प्रदूषित नगर दिल्ली | स्पोरो सिटी कहते है - कोलकता को |


-          वायु प्रदुषण इनके स्वरूप को तीन भागों में बाँटा जा सकता है – 1. गैसीय प्रदुषण,जैसे –CO2, co, CH4, CFCs, so2, नाईट्रोजन आक्साइड, हाईड्रोजन सल्फाइड, 2. सूक्ष्म कण प्रदुषण, जैसे धात्विक और अधात्विक सुक्ष्मिक कण | सर्वाधिक प्रदुषण होता है अवशिष्ट पदार्थ के सड़ने से | भोपाल गैस दुर्घटना में कार्बन-मनो आक्साइड है |  

-          वायु प्रदुषण के प्रभाव – 1. धातुओं व इमारतों पर प्रभाव 2. जलवायु पर प्रभाव, 3. मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव 4.वनस्पतिओं पर प्रभाव |


-          जल प्रदुषण विश्व की जल राशि का लगभग 97%भाग समुद्र के खरे जल के रूप में है, शेष 3% तजा जल है, इस ताजे जल का तीन चौथाई भाग हिमनदों तथा बर्फीली चोटियों के रूप में हैं, शेष एक चौथाई भाग सतही जल के रूप में हैं, झीलों तथा नदियों में विद्यमान ताजे जल, कुल जल का 0.035%है ! अदृश्य प्रदूषण का कारण अम्लीय वर्षा | जल की सर्वाधिक आवश्यकता वाली उद्योग कागज उद्योग | पारा युक्त जल से प्रभावित अंग श्वसन अंग |

-          जल प्रदूषित के प्रकार – 1. बायोलाजिकल आक्सीजन डिमान्ड (S.O.D) – वह आक्सीजन की मात्रा जो हवा की उपस्थिति में सूक्ष्म जीवों द्वारा कार्बनिक पदार्थों के अपघटन में प्रयुक्त होती है ! 2. केमिकल आक्सीजन डिमांड (B.O.D.) – प्रदूषित जल में विद्यमान कार्बनिक पदार्थो को अपने विघटन के लिए जितनी आक्सीजन की आवश्यकता होती है !

-          जल प्रदुषण के स्रोत शव प्रवाह, वाहित मल अपमार्जक, कृषिअपशिष्ट, तापीय प्रदुषण, औद्योगीकरण, आदि !

-          जल प्रदुषण के प्रभाव – 1. जल स्रोतों का प्रदुषण, 2. सजीवों एवं पादपों पर प्रभाव 3. समुन्द्र पर प्रभाव 4. स्वास्थ्य पर प्रभाव आदि ! समुद्री प्रदुषण का कारण नाभिकीय परिक्षण है | भारत की समुद्रीय तट रेखा की लम्बाई – 6100 किलोमीटर | भारत में पाई जाने वाली समुद्री तुफान चक्रवात के कारण है|

-          जल प्रदुषण का नियन्त्रण – 1. नदियों, तालाबों, आदि जल स्रोतों के पास मल-मूत्र का त्याग नहीं करें 2. जल संयंत्रों में जल का शुद्धिकरण व देखभाल हों ! 3. जल स्रोतों के समीप किसी प्रकार के अवशिष्टों फैलाव न हों ! 4. प्प्र्दुषित जल में क्लोरिन टेबलेट डालने से वैक्ट्रिया आदि मर जाते हैं !


-          मृदा प्रदुषण के कारक- नगरों एवं कारखानों का अवशिष्ट, कृषि क्रियाये, उर्वरक प्रयोग, कीटनाशक, मृदा अनुकूलन,धूम्रक एवं अन्य रासायनिक पदार्थ, फार्म पशु, जैविक एजेन्ट, खनिजीकरण और रेडियोएक्टिव पदार्थ !मृदा प्रदुषण के प्रभाव भूमि की क्षारीयता बढ़ती है, जल की सान्द्रता बढ़ती है !मृदा प्रदुषण नियन्त्रण – 1. संश्लेषित जैव उर्वरक पर निर्भरता कम की जाय 2. नाभिकीय विस्फोटकों को उपजाऊ भूमि पर न करके खिन किया जाय 3. सीवेज एवं औद्योगिक इकायों के अपशिष्टों का शोधन एवं शुद्धिकरण !


-          ध्वनि प्रदुषण मनुष्य की सामान्य ध्वनि की तीव्रता लगभग 60 dB , स्कूटर,बस, ट्रक, की लगभग 90 dB, जेट की लगभग 150 dB इसके उपर कष्टदायक एवं 120 dB से अधिक पर पीड़ा लगती है !ध्वनि प्रदुषण के स्रोत – 1. प्राकृतिक स्रोत जैसे बादलों की गडगडाहट ! 2. कृत्रिम स्रोत जैसे वाहनों के हार्न, सायरन, लाउडस्पीकर आदि ! ध्वनि प्रदुषण के प्रभाव – 1. कान में कुप्रभाव 2. मनुष्य में चिडचिडापन एवं मानसिकता की असामानता 3. उच्च रक्त चाप 4. एड्रिनल हार्मोन की अत्यधिकता ! ध्वनि ली तीव्रता मापी जाती है डेसीबल | अनिद्रा रोग प्रभाव है ध्वनि प्रदुषण |


-          रेडियोधार्मी प्रदुषण यह न्यूक्लियर विस्फोट या ऊर्जा से संभव है, रेडियो समस्थानिकों की वृद्धि से विस्फोट, जापान का नागासाकी एवं हिरोशिमा इसका उदाहरण है ! रेडियोधार्मी प्रदुषण का वर्गीकरण – 1. प्राकृतिक रूप से उत्पन्न रेडियोन्युक्लियड्स जैसे युरेनियम, रेडियम आदि 2. कृत्रिम स्रोत से प्राप्त हिने वाले रेडियोन्युक्लियड्स जैसे रुथेनियम, आयोडीन, बेरियम, सीजियम आदि ! भारत में अणु भट्टी है ट्राम्बे में | भारत में प्रति व्यक्ति उर्जा का खपत – 210 मेगावाट है | रेडियो एक्टिव विकिरण के प्रकार – 1. कणिकामय विकिरण -1. अल्फा कण 2. बीटा कण ! 2. इलैक्ट्रोमैगनेटीक विकिरण . Neutrons ,.  x-rays,.  cosmic ray ! इसी प्रकार 2600A० तरंग दैधर्य वाली पराबैंगनी किरणें भी DNA के द्वारा अवशोषित होकर उत्परिवर्तन को प्रेरित करती है ! प्रभाव. तात्कालिक प्रभाव जैसे पेड़-पौधे, इमारते सब जल कर रख हों जाना, क्रिमोसोम्स का उत्परिवर्तन, धातुओं का पिघलना ! . दीर्घकालीन प्रभाव कैंसर की बीमारी, अवांछनीय परिवर्तन आदि ! विकिरणों के जैविक प्रभाव . रेडियोधर्मी विकिरण मनुष्यों की जन्न क्षमता क्षीण कर असामाजिक बुडापा उत्पन्न करना ! . Strontium-90, calcium के समान कार्य करके तथा हड्डियों में अवशोषित होकर ल्यूकीमिया एवं कैंसर जैसी घातक बीमारी उत्पन्न करता है ! iodine-131,thyroid cancer उत्पन्न करता है ! . तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर विभिन्न प्रकार के संवेदी रोग उत्पन्न करता है, . ब्त्रीब्रेट्स में antibodies और  antigens उत्पन्न करने की शक्ति क्षीण हों जाति है ! . जिनिक उत्परिवर्तन उत्पन्न करते हैं ! नियन्त्रण बम बिस्फोट, न्यूक्लियर ऊर्जा,तथा न्यूक्लियर परिक्षण आदि से जुड़ा हुआ है !

-          पेस्टीसाइड प्रदुषण जैसे – pesticides, weedicides, insecticide, nematicides, fungicide,DDT, BHC, Aldrin dialdrin  आदि ! डी डी टी एक शक्तिशाली पेस्टीसाइड है !

-          भारत की प्रदूषित प्रमुख नगर दिल्ली, मुम्बई, कलकत्ता, लखनऊ, जयपुर आदि

-          भूकंप की दृष्टि से अत्यधिक खतरे-हिमालय पर्वत, उतर पूर्वी भारत, कच्छ, रत्नगिरि के आस-पास का पश्चिमी तटीय तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आदि ! भूकम्प मापी यंत्र है सिस्मोग्राफ | भूकम्प के कारण हैं पृथ्वी का आंतरिक हलचल | संसार में आनेवाली चक्रवातों में से 6% भारत में आते हैं, बंगलादेश के बाद संसार में बाढ़ प्रकोप से पीड़ित देशों में भारत का दूसरा स्थान है, भारत के कुल क्षेत्रफल के 19% भाग को सूखे की मर झेलनी पड़ती है,

 

 

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