Friday, March 18, 2022

पारिस्थितिकी एवं पारिस्थितिकीय तंत्र की वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर / PAARISTHITI EVN PAARISHTITIKIY TNTR KI VSTUNISHT PRSHNOTTR

                                                        पारिस्थितिकी एवं पारिस्थितिकीय तंत्र

-           Ecology शब्द सर्वप्रथम प्राणीशात्री एच रीटर ने प्रस्तावित किया

-          परिस्थितिकी को आधुनिक संदर्भ देने का श्रेय जर्मन जीव विज्ञानी अर्नष्ट हैकेल को है

-          किसी क्षेत्र में कार्य करने वाले जैविक एवं अजैविक अंशों का सम्पूर्ण योग ही परिस्थितिकीय तंत्र कहलाता है

-          परिस्थितिकीय तंत्र प्रकृति की एक-क्रियात्मक ईकाई है

-          परिस्थितिकी तंत्र शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग ए० जी० टेंन्सले 1935 ई० में किया

-          परिस्थितिकी तंत्र के दो संघटक – (1) अजैविक (2) जैविक

-          अजैव घटक तीन प्रकार जलवायुवीय, अकार्बनिक, कार्बनिक

-          जलवायुवीय घटक में-वायु,प्रकाश,जल,आर्द्रता,ताप प्रकाश शक्ति है

-          पौधे में विद्यमान क्लोरिफिल प्रकाश संशलेषण में सहायक है


-          अकार्बनिक घटक नाईट्रोजन,हाई ट्रोजन, सल्फर, फास्फोरस, कैलिशियम, मैग्नीशियम,आंक्सीजन, कार्बनडाइ आंक्साइड, जैसे गैस है !

-          कार्बनिक घटक प्रोटीन, लिपिड, कार्बोहाईट्रेड्स तथा वसा


-          जैविक घटक तीन भागों में बांटा जा सकता है उत्पादक, उपभोकता, अपघटनकर्ता

-          उत्पादक घटक हरे पेड़ पौधे, वे सभी वनस्पतियाँ आती है, जो सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण प्रक्रम के द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं !

-          उपभोक्ता वे जीव जन्तु आते हैं,जो अपने भोजन प्राप्ति के लिए प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से वनस्पतियों पर निर्भर होते हैं 

-          उपभोक्ता जीव तीन भागों में विभक्त हैं प्राथमिक उपभोक्ता, द्वितीय उपभोक्ता, तृतीय उपभोक्ता

-          प्राथमिक उपभोक्ता ग्रासकोप, छोटी मछली, तितलियाँ, मधुमखियाँ, बकरी, भेड़, गाय, भैंस,खरगोश, इत्यादि !

-          द्वितीय उपभोक्ता चिड़िया,छिपकलियाँ, झीगुर, मेढक, इत्यादि

-          तृतीय उपभोक्ता शेर, चीता,शार्क, बड़ी मछलियाँ, मगरमच्छ, उल्लू, बाज, सांप, आदि

-          अपघटक इसमें सूक्ष्म जीव आते हैं जीवाणु, कवक, इत्यादी !


-          पारिस्थितिकी तंत्र में खाद्य श्रृंखला का प्रत्येक स्तर पोषण स्तर कहलाता है इसे ऊर्जा स्तर भी कहते हैं

-          पारिस्थितिकी तंत्र के उत्पादकों द्वारा जो विभिन्न प्रकार के कार्बनिक प्रदार्थ संशलेषित होते हैं, प्रथम पोषण स्तर कहलाते हैं

-          विभिन्न प्रकार के शाकाहारी जन्तु द्वितीय पोषण स्तर पर आते हैं

-          शाकाहारी जन्तुओं को भक्षण करने वाले मांसाहारी जन्तु तृतीय पोषण स्तर का निर्माण करते हैं

-          उच्च स्तर के मांसाहारी जन्तु चतुर्थ पोषण स्तर कहलाते हैं

-          उपभोक्ता की एक श्रृंखला जो अंतिम स्तर कहलाते हैं वह सर्व उपभोक्ता कहलाता है

-          पोषण में ऊर्जा का 10% भाग ही उपयोग में आता है

-          पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह एकलमार्गी होता है

-          अन्तिम पोषण स्तर सर्वोच्चय उपभोक्ता कहलाता है


-          खाद्य श्रृंखला में उत्पादक-शाकाहारी-माँसाहारी की अनुक्रम होती है

-          स्थलीय पारिस्थितिकीय तंत्र जैसे- खरगोश,साँप, बाज आदि

-          महासागरीय तंत्र जैसे पादप पप्लवक , प्राणी प्रवक , छोटी मछली, बड़ी मछली, सबसे बड़ी मछली

-          तालाब की श्रृंखला जैसे शैवाल-प्रोतोजोआ-छोटी जलीय कीट-छोटी मछलियाँ-बड़ी मछलियाँ

-          खाद्य श्रृंखला जाल -: घास-टिड्डा-छिपकलियाँ-बाज

-          पारिस्थितिकी पिरामिड की खोज एल्टन 1927 ई० में की

-          स्थल में जैव संख्या का पिरामिड सीधा बनेगा जिसमें पिरामिड का आकर चौड़ा होगा और शिखर की ओर उपभोक्ताओं की संख्या कम होने के कारण क्रमश: कम होता जाता है

-          जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में जैव भार का पिरामिड उल्टा बनता है इसमें पिरामिड का आधार कम होगा तथा शिखर की ओर अधिक होता है

-          दलदलीय पारिस्थितिकीय तंत्र के पादप माईरियोफल्म,हाईड्रिला, पोटेभिजेटान, वैलिसने रिया, युट्रीकुलेरिया, आदि  

-          जल स्तर कम वाले पारिस्थितिकीय तंत्र के पादप ट्रापानिम्फीया, मोनोकोरिया, एपोनोजिटाँन आदि

-          कुछ स्वतंत्र तैरनेवाले पादप एजोला, युल्फिया, पिस्टिया, साल्पिनिया, आदि

-          आंशिक जल स्तर वाले पादप टाइफा, सेजीटोरिया, सिरपस, फ्रेग्माइटिस, आदि

-          शीतोष्ण वन के वृछ एसर, क्युरक्स, अल्पस आदि

-          पतझड़ वन के वृछ या उष्णकटिबंधीय आम्र, बबूल, बाँस, जामुन, महुआ, शीशम, साल, सिरीस, नारियल, कटहल, अमलतास, आदि

-          आर्द्रता की कमी और ताप की अधिकता के कारण वाले वृछ राईजोकापोर्न, राईनोडिना, लेकोनोरा आदि

-          विश्व में घास के स्थल 10% भाग सबसे बड़ा पारिस्थितिकी तंत्र है

-          भारत में नीलगिरी प्रमुख पारिस्थितिकी तंत्र है

-          वायुमण्डल में उपस्थित गैसों में कार्बनडाईआंक्साइड 0.03 %होती है

-          वायुमंडलीय संरचना में आंक्सीजन की मात्रा 21%तथा नाईट्रोजन 78% होती है

-          पृथ्वी का लगभग 70.2%भाग जलमग्न है

-          कल कारखानों एवं औद्योगिक संस्थानों तथा विभिनों प्रकार के वाहनों के धुएँ के साथ so2 गैस निकलती है

-          सल्फर डाईआक्साइड आंक्सीजन द्वारा या वर्षा के जल के साथ अभिक्रिया करके स्ल्फ्युरिक अम्ल में बदल जाती है

-          वर्षा के जल के साथ सल्फ्यूरिक अम्ल का पृथ्वी पर गिरना अम्लीय अथवा तेजाबी वर्षा कहलाती है

-          हरे पौधों में होने वाले सबसे महत्वपूर्ण अभिक्रिया प्रकाश-संश्लेषन पर so2 का प्रभाव पड़ता है

-          पानी यात्रा निकली गई उत्तरप्रदेश में

-          अम्लीय वर्षा होती है नार्वे में

-          ओजोन परत में सबसे बड़ा छिद्र है अंटार्कटिका में

-          ओजोन का परत धरती के उपर है – 12 से 50 कि० मी०

-          अम्लीय वर्षा से खतरा है ताजमहल को 

1 comment:

अमीर खुसरो के दोहे, मुकरियाँ और गीत /amir khsro ke dohe mukriyan or geet

                                         अमीर खुसरो के दोहे, मुकरियाँ और गीत   1.      एक नार किया -----------------------------------...