वन संसाधन
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पृथ्वी की सतह पर 1/3 भाग वनों से घिरा है
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50% भाग उष्णकटिबंधीय प्रकार
के वनों से आच्छादित है
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भारत में लगभग 22.74% भाग वनों से घिरा है | झारखंड में 29.09% है |
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कोयले की तुलना में लकड़ी
ज्यादा सुरक्षित इंधन है, क्योंकि इसमें सल्फर की
मात्रा कम होती है तथा जलाने पर रख भी कम देती है ,
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वनों का हमारे वातावरणीय
सुरक्षा में योगदान –
(1)
जल तथा वायु क्षारण से
मृदा का संरक्षण करती है
(2)
वर्षा के जल के बहाव को
रोककर बाढ़ की सम्भावना को कम करते है
(3)
वनों का पादप आवरण मृदा
नमी की वाष्प रोकता है
(4)
वायुमण्डल में
कार्बनडाइआँक्साइड तथा आंक्सीजन के क्रान्तिक संतुलन को बनाये रखता है
(5)
कार्बन डाइआँक्साइड तथा
सल्फरडाइआँक्साइड इत्यादी हानिकारक गैसों का वायुमण्डल से अवशोषण कर पर्यावरण को
स्वस्थ्य बनाये रखते हैं
(6)
वायुमंडलीय आर्द्रता को
अपक्षेपित करने में कारण बनकर वर्षा में सहायक होते हैं
(7)
ग्रीष्म ऋतु में तापमान
घटाने तथा सहित ऋतु में तापमान में वृद्धि में सहायक होते हैं
(8)
भूमि की उर्वरता बढ़ाने
में सहायक होते हैं
(9)
जीव जन्तु के लिए आवास
तथा भोजन उपलब्ध कराते हैं
(10)पृथ्वी का जल-चक्र निरन्तर रहता है
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आई आई टी मुम्बई के एक
सर्वेक्षण के अनुसार सुनामी लहरों द्वारा प्रलय का एक विशेष कारण समुद्री क्षेत्र से
मेंग्रुव वनस्पति का विनाश है !
निर्वनिकरण
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विश्व में सवसे अधिक जैव-विविधता प्रदर्शित करने वाला क्षेत्र उष्णकटिबंधीय क्षेत्र
है
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निर्वनिकरण की क्रिया
विधि –
(1)
कृषकों द्वारा वनों को
काटना जलाना
(2)
वनों की लकड़ी का दोहन जलाऊ लकड़ी बका दोहन
(3)
नवीन वनों के लगाने के
लिए पुराने वनों का नाश
(4)
कृषि के लिए वनों का नाश
(5)
शहरीकरण, खनन तथा खनिज तेल प्राप्ति के लिए वनों का नाश
(6)
सड़क व बांध निर्माण के
लिए वनों का नाश
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निर्वनिकरण के कारण –
(1)
जनसंख्या वृद्धि
(2)
झूम खेती
(3)
औधोगिक व घरेलू
आवश्यकताओं के लिए लकड़ी की माँग
(4)
खनन क्रिया
(5)
वनों में आग
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