पारिस्थितिकी एवं पारिस्थितिकीय तंत्र
-
Ecology शब्द सर्वप्रथम
प्राणीशात्री एच रीटर ने प्रस्तावित किया
-
परिस्थितिकी को आधुनिक
संदर्भ देने का श्रेय जर्मन जीव विज्ञानी अर्नष्ट हैकेल को है
-
किसी क्षेत्र में कार्य
करने वाले जैविक एवं अजैविक अंशों का सम्पूर्ण योग ही परिस्थितिकीय तंत्र कहलाता
है
-
परिस्थितिकीय तंत्र
प्रकृति की एक-क्रियात्मक ईकाई है
-
परिस्थितिकी तंत्र शब्द
का सर्वप्रथम प्रयोग ए० जी० टेंन्सले 1935 ई० में किया
-
परिस्थितिकी तंत्र के दो
संघटक – (1) अजैविक (2) जैविक
-
अजैव घटक तीन प्रकार – जलवायुवीय, अकार्बनिक, कार्बनिक
-
जलवायुवीय घटक में-वायु,प्रकाश,जल,आर्द्रता,ताप प्रकाश शक्ति है
-
पौधे में विद्यमान क्लोरिफिल
प्रकाश संशलेषण में सहायक है
-
अकार्बनिक घटक – नाईट्रोजन,हाई ट्रोजन, सल्फर, फास्फोरस, कैलिशियम, मैग्नीशियम,आंक्सीजन, कार्बनडाइ आंक्साइड, जैसे गैस है !
-
कार्बनिक घटक – प्रोटीन, लिपिड, कार्बोहाईट्रेड्स तथा वसा
-
जैविक घटक तीन भागों में
बांटा जा सकता है – उत्पादक, उपभोकता, अपघटनकर्ता
-
उत्पादक घटक – हरे पेड़ पौधे, वे सभी वनस्पतियाँ आती है, जो सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण
प्रक्रम के द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं !
-
उपभोक्ता – वे जीव – जन्तु आते हैं,जो अपने भोजन प्राप्ति के लिए प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से
वनस्पतियों पर निर्भर होते हैं
-
उपभोक्ता जीव तीन भागों
में विभक्त हैं – प्राथमिक उपभोक्ता, द्वितीय उपभोक्ता, तृतीय उपभोक्ता
-
प्राथमिक उपभोक्ता – ग्रासकोप, छोटी मछली, तितलियाँ, मधुमखियाँ, बकरी, भेड़, गाय, भैंस,खरगोश, इत्यादि !
-
द्वितीय उपभोक्ता – चिड़िया,छिपकलियाँ, झीगुर, मेढक, इत्यादि
-
तृतीय उपभोक्ता – शेर, चीता,शार्क, बड़ी मछलियाँ, मगरमच्छ, उल्लू, बाज, सांप, आदि
-
अपघटक – इसमें सूक्ष्म जीव आते हैं – जीवाणु, कवक, इत्यादी !
-
पारिस्थितिकी तंत्र में
खाद्य श्रृंखला का प्रत्येक स्तर पोषण स्तर कहलाता है इसे ऊर्जा स्तर भी कहते हैं
-
पारिस्थितिकी तंत्र के
उत्पादकों द्वारा जो विभिन्न प्रकार के कार्बनिक प्रदार्थ संशलेषित होते हैं, प्रथम पोषण स्तर कहलाते हैं
-
विभिन्न प्रकार के
शाकाहारी जन्तु द्वितीय पोषण स्तर पर आते हैं
-
शाकाहारी जन्तुओं को
भक्षण करने वाले मांसाहारी जन्तु तृतीय पोषण स्तर का निर्माण करते हैं
-
उच्च स्तर के मांसाहारी
जन्तु चतुर्थ पोषण स्तर कहलाते हैं
-
उपभोक्ता की एक श्रृंखला जो
अंतिम स्तर कहलाते हैं वह सर्व उपभोक्ता कहलाता है
-
पोषण में ऊर्जा का 10% भाग ही उपयोग में आता है
-
पारिस्थितिकी तंत्र में
ऊर्जा का प्रवाह एकलमार्गी होता है
-
अन्तिम पोषण स्तर
सर्वोच्चय उपभोक्ता कहलाता है
-
खाद्य श्रृंखला में – उत्पादक-शाकाहारी-माँसाहारी की अनुक्रम होती है
-
स्थलीय पारिस्थितिकीय
तंत्र जैसे- खरगोश,साँप, बाज आदि
-
महासागरीय तंत्र जैसे – पादप पप्लवक , प्राणी प्रवक , छोटी मछली, बड़ी मछली, सबसे बड़ी मछली
-
तालाब की श्रृंखला जैसे – शैवाल-प्रोतोजोआ-छोटी जलीय कीट-छोटी मछलियाँ-बड़ी मछलियाँ
-
खाद्य श्रृंखला जाल -: घास-टिड्डा-छिपकलियाँ-बाज
-
पारिस्थितिकी पिरामिड की
खोज एल्टन 1927 ई० में की
-
स्थल में जैव संख्या का
पिरामिड सीधा बनेगा जिसमें पिरामिड का आकर चौड़ा होगा और शिखर की ओर उपभोक्ताओं की
संख्या कम होने के कारण क्रमश: कम होता जाता है
-
जलीय पारिस्थितिकी तंत्र
में जैव भार का पिरामिड उल्टा बनता है इसमें पिरामिड का आधार कम होगा तथा शिखर की
ओर अधिक होता है
-
दलदलीय पारिस्थितिकीय
तंत्र के पादप – माईरियोफल्म,हाईड्रिला, पोटेभिजेटान, वैलिसने रिया, युट्रीकुलेरिया, आदि
-
जल स्तर कम वाले
पारिस्थितिकीय तंत्र के पादप – ट्रापानिम्फीया, मोनोकोरिया, एपोनोजिटाँन आदि
-
कुछ स्वतंत्र तैरनेवाले
पादप – एजोला, युल्फिया, पिस्टिया, साल्पिनिया, आदि
-
आंशिक जल स्तर वाले पादप – टाइफा, सेजीटोरिया, सिरपस, फ्रेग्माइटिस, आदि
-
शीतोष्ण वन के वृछ – एसर, क्युरक्स, अल्पस आदि
-
पतझड़ वन के वृछ या
उष्णकटिबंधीय – आम्र, बबूल, बाँस, जामुन, महुआ, शीशम, साल, सिरीस, नारियल, कटहल, अमलतास, आदि
-
आर्द्रता की कमी और ताप
की अधिकता के कारण वाले वृछ – राईजोकापोर्न, राईनोडिना, लेकोनोरा आदि
-
विश्व में घास के स्थल 10% भाग सबसे बड़ा पारिस्थितिकी तंत्र है
-
भारत में नीलगिरी प्रमुख
पारिस्थितिकी तंत्र है
-
वायुमण्डल में उपस्थित
गैसों में कार्बनडाईआंक्साइड 0.03 %होती है
-
वायुमंडलीय संरचना में
आंक्सीजन की मात्रा 21%तथा नाईट्रोजन 78% होती है
-
पृथ्वी का लगभग 70.2%भाग जलमग्न है
-
कल कारखानों एवं औद्योगिक
संस्थानों तथा विभिनों प्रकार के वाहनों के धुएँ के साथ so2 गैस निकलती है
-
सल्फर डाईआक्साइड
आंक्सीजन द्वारा या वर्षा के जल के साथ अभिक्रिया करके स्ल्फ्युरिक अम्ल में बदल
जाती है
-
वर्षा के जल के साथ
सल्फ्यूरिक अम्ल का पृथ्वी पर गिरना अम्लीय अथवा तेजाबी वर्षा कहलाती है
-
हरे पौधों में होने वाले
सबसे महत्वपूर्ण अभिक्रिया प्रकाश-संश्लेषन पर so2 का प्रभाव पड़ता है
-
पानी यात्रा निकली गई – उत्तरप्रदेश में
-
अम्लीय वर्षा होती है – नार्वे में
-
ओजोन परत में सबसे बड़ा
छिद्र है – अंटार्कटिका में
-
ओजोन का परत धरती के उपर
है – 12 से 50 कि० मी०
-
अम्लीय वर्षा से खतरा है – ताजमहल को
VERYGOOD
ReplyDelete